चंदौली : बेमौसम बरसात ने बढ़ाई किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें,सैकड़ों कुंतल धान भीगकर हुए नमी के शिकार…

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धान क्रय केंद्रों पर सामने आई बदहाल व्यवस्थाओं की बानगी…

ओ पी श्रीवास्तव
चंदौली/संसद वाणी : सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने की जुगत में लगे किसान इन दिनों बड़ी परेशानियों से जूझ रहें हैं। ऑनलाइन टोकन सिस्टम, खरीद प्रक्रिया में लेट लतीफी के साथ ही बेमौसम बरसात की मार झेलने को किसान विवश हैं। बरसात के बाद आई नमी के कारण खरीद की प्रक्रिया भी प्रभावित है। इतनी समस्याओं से दो – चार होने के बाद भी किसान अपनी बारी का इंतजार करते हुए क्रय केंद्रों पर पड़े अपनी फसल को बेचने पर व सहेजने की जुगत में मुस्तैद हैं।
कुछ इन्ही परेशानियों को झेल रहे धान के कटोरे में बदहाल व्यवस्थाओं के बीच जनपद चंदौली के मुख्यालय स्थित नवीन मंडी क्रय केंद्र पर किसान दिखाई दिए। बची – खुची कसर बेमौसम बरसात की मार ने पूरी कर दी, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बता दें कि जनपद में सुबह एकाएक हुई बरसात की जद में आकर क्रय केंद्रों पर खरीद को रखे धान की फसल बरसात की चपेट में आकर गीली हो गई। बिना किसी इंतजाम क्रय केंद्रों पर रखे किसानों की सैकड़ों कुंतल फसल बरसात की भेंट चढ़ गई। आनन – फानन में किसान अपने खर्चे पर प्लास्टिक की पन्नी लेकर पहुंचे और बारिश से अपनी फसल की भिगोने से बचाने की जुगत में युद्धस्तर पर जुट गए।
इस दौरान मौके पर मौजूद किसानों ने सरकार व स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं के दावे को खोखला बताया, कहा कि पिछली बार ही उक्त क्रय केंद्र पर टीन का शेड पूरे परिसर निर्माण किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन साल बीत गया किसी ने सुधि तक नहीं ली। मौके पर उन्होंने बताया कि धान खरीद को फसल कई दिनों से पड़ी है लेकिन नंबर आने के बाद भी खरीद की प्रक्रिया धीमी है। बताया कि 18 प्रसेंट नमी की कटौती है, किंतु बेमौसम बरसात से फसल भीग जाने के बाद नमी में बढ़ोत्तरी के साथ ही खरीद में समय लगना तय है, व्यवस्था भी नदारद है कि धान को सुखाया जाए।

इसलिए कई किसान के सैकड़ों कुंतल धान बारिश में भीग जाने के कारण नमी की कटौती होगी, जो घाटे का सौदा होगा। हालांकि बता दें की सरकार क्रय केंद्रों पर फसल ढकने की व्यवस्था की उपलब्धता सुनिश्चित होने की बात करती है, लेकिन नवीन मंडी क्रय केंद्र समेत अन्य केंद्रों पर बरसात की मार के साथ ही अव्यवस्थाओं का बोलबाला सामने आया है। देखना लाजिमी होगा कि जिला प्रशासन अब इस कमी और अन्नदाताओं की इस परेशानियों के बाबत क्या कुछ कदम उठाता है।

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