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Saturday, July 13, 2024

चंदौली में खाकी को दागदार बनाने का कुचक्र: कामगारों का बकाया मजदूरी ठेकेदार से वापस कराना खाकी कर्मी को पड़ा महंगा, ठेकेदार ने लगाया झूठा आरोप, एसपी से की शिकायत…

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ओ पी श्रीवास्तव
चंदौली/संसद वाणी:
खबर जनपद चंदौली से है जहां खाकी को बदनाम करने का कुचक्र सामने आया है। बता दें कि नौगढ़ क्षेत्र में जिस वनतुलसी घास को लेकर चंद्रप्रभा चौकी इंचार्ज को लेकर बदनाम करने की साजिश रची गई है, उस वन तुलसी घास की कटाई डीएफओ की अनुमति के बिना संभव नहीं है, दो साल पूर्व ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन सालकडीहा निवासी ठेकेदार ने कामगारों को उनका पारिश्रमिक दो साल से बाधित कर रखा था। कामगारों ने जब इसकी शिकायत चंद्रप्रभा चौकी पर की तो पुलिस की कार्रवाई को व्यापारी से सुविधा शुल्क लेने का दबाव और धमकी देने का तूल पकड़ा दिया गया। हालांकि वायरल आडियो और ठेकेदार द्वारा एसपी चंदौली को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर जांच की कार्रवाई जारी है।

जानिए क्या है पूरा मामला….

विदित हो की सकलडीहा निवासी ठेकेदार संजय यादव उर्फ सोनू द्वारा नौगढ़ क्षेत्र के जंगलों में वन तुलसी घास का व्यापार किया जाता था। यह घास ईंट भट्ठा संचालक ईंधन के रूप में प्रयोग में लाते हैं। वन तुलसी घास की इस उपयोगिता के मद्देनजर इसका व्यापार होने लगा। जोरों शोरों से शुरू इस धंधे पर अब वन विभाग के अधिकारियों द्वारा रोक लगा दी गई है। लेकिन चोरी – छिपे यह खेल जारी है। इसी को आधार बनाकर खाकी को बदनाम करने का पूरा कुचक्र रचा गया। इस कुचक्र के खेल में चंद्रप्रभा चौकी, नौगढ़ और चकिया थाना तक को लपेट दिया गया। जिसमें बकायदा फिक्स रेट तक का ब्यौरा दिया गया है। ठेकेदार ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर खाकी को दागदार करने के कथ्य पेश किए और कहा कि पिछले कई माह से वन तुलसी घास का करोबार बंद होने की वजह से चौकी पर फिक्स रेट नहीं दे पाया तो चंद्रप्रभा चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र शर्मा ने पैसा ना देने की वजह से ट्रैक्टर जंगल में ना ले जाने तक की धमकी तक दे डाली। इसके बाद वह मजदूरों को पैसा देने के लिए 13 अप्रैल को घर से जंगल गया। इस दौरान चौकी इंचार्ज से मुलाकात होने पर उन्होंने चौकी कई घंटे बैठाए रखा। आरोप लगाया कि मजदूरों को देने के लिए रखे पैसे भी ले लिए।


जबकि संसद वाणी की पड़ताल में मजदूरों द्वारा पारिश्रमिक भुगतान नहीं करने पर कामगारों ने मामला दर्ज कराया था और ठेकेदार को मजदूरों का पैसा रिटर्न करने वास्ते बुलाया गया था। बकायदा लिखित सुलहनामा कराकर पुलिस ने ठेकेदार से मजदूर को 9 हजार पांच सौ वापिस कराए थे। पुलिस द्वारा दबाव व सख्त कार्रवाई से नाखुश ठेकेदार ने आरोप लगाते हुए एसपी के समक्ष गुहार लगाई। हालांकि इस दौरान कुछ लोग उसके मददगार बनते गए। मूल प्रकरण को छोड़ ठेकेदार ने खाकी को ही बदनाम कर डाला। जबकि उसके द्वारा वायरल आडियो में कही भी लेन देन की बात सामने नहीं आई है। बतौर चौकी इंचार्ज की माने तो उक्त आडियो कामगारों का पैसा ना देने पर उसे बुलाने के लिए फोन से सूचना दिया था। हालांकि पूरे प्रकरण पर एसपी ने सीओ नौगढ़ को जांच सौंपी है। अब देखना लाजिमी होगा कि जांच की प्रकिया में दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई होती है या खाकी के दामन पर छींटे पड़ते हैं।

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