संतान की दीर्घायु और सुख शान्ति के लिए व्रत रख महिलाएं अलसुबह से ही सभी गणेश मंदिर में दर्शन पूजन के लिए उमड़ी

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प्रहलाद पाण्डेय
वाराणसी/संसद वाणी : कंपकपाती ठंड और कोहरे के बीच भोर से ही व्रती महिलाएं दर्शन पूजन कर रहीं है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि (गणेश चतुर्थी) पर सोमवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी उनके पुत्र प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना में लीन हैं। संतान की दीर्घ आयु और परिवार में सुख शान्ति के लिए व्रत रख महिलाएं अलसुबह से ही सभी गणेश मंदिर में दर्शन पूजन के लिए उमड़ रहीं है। दरबार में जय गणेश के जयकारे के साथ हर-हर महादेव का जयघोष भी गूंज रहा है। इसके पहले ब्रह्म मुहूर्त में भगवान गणेश के विग्रह को पंचामृत से स्नान कराकर नूतन वस्त्र पहनाए गए और भोग आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। दोपहर में बाबा का विशेष श्रृंगार कर आरती की गई। अर्ध रात्रि में बड़ा गणेश भगवान की विशेष पूजन कर महाआरती की जायेगी। उधर, महिला श्रद्धालुओं के चलते मंदिर का इलाका मेले में तब्दील हो गया है।

भगवान श्री गणेश ने ही माता पार्वती को बताया था। इस व्रत में जल में तिल डालकर स्नान किया जाता है और फलाहार में तिल का ही इस्तेमाल किया जाता है। गणेश जी की पूजा भी तिल से की जाती है और उन्हें तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। इसे तिल चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। व्रत करने से सभी प्रकार के संकट समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

दुर्गाकुंड स्थित दुर्ग बिनायक गणेश मंदिर में भोर की आरती के बाद भगवान गणेश का दर्शन पूजन प्रारंभ हो गया। अब तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन पूजन कर चुके हैं। भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग लगाया जा रहा है। इस दौरान मंदिर परिषद को सुंदर फूलों और फलों से सजाया गया है।

सोनारपुरा स्थित चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शनार्थियों की लंबी कतार लगी रही। पुजारी ने बताया कि भगवान गणेश का लेप और शृंगार होने के बाद सुबह 4.30 बजे से मंदिर का पट खोल दिया गया। इसके बाद दर्शन पूजन का दौर शुरू हो गया।

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