ब्राह्मण रूपी हनुमान को प्रभु पहचान ही गये

Estimated read time 1 min read
Spread the love

राजन जी महाराज ने संसद वाणी के पत्रकार विश्वनाथ प्रताप सिंह सहित सभी पत्रकारों को मोमेंटो देकर सम्मानित किये

दीपक कुमार सिंह

चोलापुर/संसद वाणी -थाना क्षेत्र के अंतर्गत महावीर मन्दिर के पास स्थित डी के उपवन में कथा के नौवे दिन कथा वाचक राजन महाराज ने प्रभु शिव देवाधिदेव के पुनीत नगरी में अपने भक्तों को बताया कि प्रभु शिव माता पार्वती जी को प्रभु राम की मानस कथा के आगे की कथा बताते हुये कहा कि जब सुग्रीव पहाड़ से देखा कि दो बालक मेरे क्षेत्र दिख रहे । हनुमान जाकर पता करो।हनुमान जी ब्राह्मण रूप धर कर बीच रास्ते मे लेट गए।प्रभु राम लेटे हुये ब्राह्मण रूपी हनुमान को जानते थे कि प्रभु राम स्वयं उठाने जाते है। हनुमान जी ने कहा मानव रूपी हनुमान का आप परिचय पूछते है। आप स्वयं प्रभु है सब जानते है।प्रभु राम जी ने हनुमान जी को गले लगाने के दौरान हनुमान जी बहुत रोये की लक्षण जी के आगे प्रभु हमको भूल गए।प्रभु राम ने कहा आप हनुमान मेरे हृदय में बसते है।जिनकी मैं हमेशा पूजा करता हु।क्योकि प्रभु राम जी हनुमान को शिव स्वरूप देखते है।आगे हनुमान जी डालने राजा सुग्रीव से मिलने को कहते है।इस पर लक्ष्मण जी कहते है हनुमानपने राजा को यही बुला लाये।हम लोग बहुत पैदल चल चुके है।हनुमान जी लक्ष्मण जी से कहा कि आपको पैदल नही चलना है मैं अपने पीठ पर बैठा कर चलूंगा।यह मेरा अहो भाग्य है।वहाँ पहुच कर प्रभु राम जी सुग्रीव की कथा पूरा सुने।सुग्रीव ने कहा मेरा भाई हमेशा मुझे मारता है।मैं उससे बचने के लिये इस पर्वत पर रहता हूं। क्योकि इस पर्वत पर उसे श्राप मिला है जब वह इस पर्वत पर आएगा स्वयं भष्म हो जाएगा।एक बार माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न सभी लोगो ने निर्यण किया कि हनुमान महेशा प्रभु के पास रह कर सेवा करते है।हम लोगो को मौका नही मिलता।शिकायत स्वरूप सब लोग प्रभु के पास पहुच कहते है कि हम लोगो को आपका सेवा को अवसर ही नही मिलता।हमेशा हनुमान ही प्रभु की सेवा करते है।तब प्रभु राम ने सबको कहा कि आप लोग सेवा बांट ले।तब हनुमान जी सोचे कि यह लोग प्रभु के घर के है यह लोग बांट ले।उसके बाद हम करेंगे। तभी प्रभु रामजी को उहाई आने लगा तभी हनुमान अपनी चुटकी बजा तुरन्त प्रभु को जगा दिया।यह कार्य देख प्रभु मुसकराये।कथा की आगे जामवंत द्वारा हनुमान को लंका भेजने का कार्य किया गया।रास्ते हनुमान का सर्पो की माता सुरसा से संवाद हुआ।सुरसा से बल व बुध्दि दोनों में जितना इसके बाद लंका पहुच माता से भेंट किया वह पहुच रावण व उसके अनुचर से वाद विवाद उपरांत लंका की नगरी को तहस नहस कर आग लगाया।

आज के कथा में विशिष्ट जनों में आमंत्रित गणों में श्रवण मिश्र, विश्वनाथ प्रताप सिंह,अर्चना मिश्रा, प्रेम यादव , प्रियंका यादव,एडवोकेट प्रिंस चौबे,लोक गायक विजय लाल यादव,टेक नारायण उपाध्यक्ष प्रधान पुजारी काशी विपिन मिश्र, प्रवीण मिश्र सबलू सिंह प्रधान, राजन मिश्र, महेश चौबे आदि लोगो के साथ साथ हजारो भक्त लोग सम्मिलित हो कथा का आनन्द उठाया।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours