राजन महाराज ने अपने भक्तों को बताया कि, महर्षि विश्वामित्र जानते थे कि यह है जगदीश्वर

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संवाददाता /दीपक कुमार सिंह

चोलापुर/संसद वाणी :क्षेत्र के महावीर मंदिर के पास स्थित डी के उपवन में कथा के पांचवे दिन कथा वाचक श्री राजनजी महाराज ने अपने भक्तों को बताया कि बाबा शिव जी माता पार्वती जी प्रभु रामजी का कथा के दौरान बताया कि महर्षि विश्वामित्र जानते थे कि यह प्रभु जगदीश्वर है। इधर प्रभु रामजी इसके बावजूद विश्वामित्र जी जरा भी आभास नही होने दिया कि हम राम है।वह हमेशा ऋषि जी को आदर के साथ कार्य के आदेश एक शिष्य के भाती मान रहे थे। कथा के दौरान ऋषि के साथ यज्ञ के रक्षार्थ चल रहे थे तभी रुक गये।पथ्थर रूप शापित अहिल्या माता का उध्दार किये।माता ने प्रभु से आग्रह किया कि आप हम अगर प्रसन्न है एक कृपा मेरे करिये प्रभु अपने मन का मुझे भौरा बना दीजिये।जिससे मैं आप अगल बगल ही गुनगुनाता रह।जैसे आपके रज कमल जैसे पैर से गंगा निकली तो प्रभु शिव अपने सिर पर धारण कर लिया।मेरे पर भी कृपा करें। आगे के प्रसंग में एक समय बाली की पत्नी अपने पति को प्रभु राम जी से युद्घ करने को रोक रही थी। कि आज युद्घ आप करने मत जाईये।क्यो पत्नी को आभास हों गया था कि अगर पति गये तो अनर्थ हो जाएगा।इधर बाली भी जानता था कि यह ही प्रभु राम है। इनके हाथों से मरना हमारे लिये गौरव की बात है।बड़े बड़े ऋषि, महात्मा लोग भी तपस्या करने के उपरांत भी उनकी मुक्ति नही पाती।

आगे भ्रमण के दौरान प्रभु राम व लक्ष्मण जी मिथिला नगर में जब प्रवेश किया तो उस नगर के नर नारी कोई घर से, कोई कार्य को छोड़ कर भागना प्रारम्भ किये अपने नगर आये दोनों लोगो को देखने पूरा मिथिला नगर उमण पड़ा।आज के कथा सुनने वालों में श्रवण कुमार मिश्र, अर्चना मिश्र,पुनीत मिश्र, प्रवीण मिश्र, ज्ञानेंद्र प्रकाश पांडेय, प्रेम यादव, खुनखुन चौबे,नितेश मिश्र,कृष्णकांत मिश्र,अन्नू चौबे,विपिन मिश्र,भैरव यादव, प्रिंस चौबे के अलावा हजारो भक्त जन ने कथा सुन कर भाव विभोर हुये।

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