काशी में प्रभु राम की कथा हो परम आनंद- राजन महाराज

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संवाददाता/दीपक कुमार सिंह

चोलापुर/संसद वाणी : क्षेत्र के महावीर मंदिर के पास डी के उपवन में कथा के दूसरे दिन कथा वाचक राजन महराज अपने भक्तों को बताया कि एक बार भारद्वाज ऋषि कथा सुनने के दौरान यादवल ऋषि से पूछा कि क्या वही राम है जिनकी कथा प्रभु शिव जी सुनते है।यादवल ऋषि जी मन ही मन कहा कि भारद्वाज सब जानते हुये भी गूढ़ कथा को सुनने को मूढ़ बन कर बैठे है।और कहा कि आप जैसा प्रश्न किये उसी तरह से माता पार्वती जी भी प्रश्न की थी।अब त्रेता युग की कथा सुनाते है।एक बार प्रभु शिव सती के साथ कैलाश छोड़ अगस्त ऋषि से कथा सुनने को गयी।उसी दौरान प्रभु ने ऋषि जी से कहा कि काशी छोड़ आप कहि जाईये।तब ऋषि जी ने कहा कि काशी का कौवा भी काशी नही छोड़ना नही चाहता तो मैं कैसे छोड़ दु।जिस समय कथा सुन आकाश मार्ग से कैलाश जा रहे थे ठीक उसी के नीचे अरण्य वन पंचवटी में माता सीता का हरण कर रावण जा रहा था।उसी समय शिव जी ठीक नीचे प्रभु राम को देख मन ही मन सचिदानन्द को प्रणाम किया तो मै सती को यह लगा कि अगर यह वास्तव में प्रभु राम है तो इनको पता होना चाहिये कि इनकी सीता कहा गयी है।इससे सती के मन मे संसय हो गया।परीक्षा लेने स्वयं सीता बन प्रभु राम के सामने आई तो प्रभु राम ने खुद प्रणाम कर माता आप अकेले इस बन में कहा घूम रही है।

आराध्य प्रभु शिव जी कहा है।यह सुन माँ सती अवाक रह गयी। सती जी जब शिव जी पास पहुची तो प्रभु ने पूछा मिल गयी। उन्होंने झूट बोना नही।प्रभु मन ही मन बहुत दुखी हुये की हमारे प्रभु राम की परीक्षा लेने पहुच गयी हमारी बात नही मानी। सती जी को सीता रूप में होने पर बहुत दुखी हुये फिर सोचा यह प्रभु रामजी की माया है।जो चाहते है वही होता है।प्रभु को बार बार प्रणाम करते हुए यह संकल्प किया कि अब सती के मेरा भेंट नही होगा।सती का त्याग कर दिया।इस कथा के दौरान राजन जी महाराज ने काशी के शिव व राम में कोई अंतर नही है।जहाँ शिव है वहाँ राम है और जहाँ राम है वहाँ शिव है।कथा सुनने वालों में विशिष्ट जनों में श्रवण कुमार मिश्र, प्रेम यादव,पुनीत मिश्र,ज्ञानेंद्र प्रकाश पांडेय,अर्चना मिश्रा, प्रियंका मिश्र, सत्यनारायण दुबे मनीष चौबे,अरविंद पांडेयआदि लोगो के अलावा सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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