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उत्तर प्रदेश

यूपी में विधायकों के फोन न उठाने पर प्रशासन तैयार कर रहा है कठोर कार्रवाई

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश विधान सभा में विधायकों द्वारा repeatedly अधिकारियों के फोन न उठाने की शिकायत उठाए जाने के बाद अब सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में आरोप लगाया कि थानेदार और अन्य सरकारी अधिकारी विधायकों के फोन कॉल्स को अनदेखा कर देते हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों की समस्याएँ समय पर नहीं सुनी जा रही हैं। इस मुद्दे को उठाने के बाद सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि यह व्यवहार गलत है और अधिकारियों को अब तत्काल इस पर प्रतिक्रिया देनी होगी।


संवाद सेतु ऐप और अलर्ट सिस्टम से जवाबदेही सुनिश्चित

सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए एक तकनीकी प्रणाली भी लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी:

  • विधायकों द्वारा की गई कॉल अगर 10 मिनट के भीतर भी अधिकारी द्वारा रिसीव या रिटर्न कॉल नहीं की जाती, तो एक कमांड सेंटर से तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा।
  • इस प्रक्रिया को ‘संवाद सेतु’ ऐप के माध्यम से न केवल ट्रैक किया जाएगा, बल्कि अधिकारियों के जवाबदेही रिकॉर्ड को भी मॉनिटर किया जाएगा।
  • हर जिले में डिस्ट्रिक्ट कमांड सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जो कॉल ट्रैकिंग, अलर्टिंग और निगरानी का काम करेंगे।
  • इस प्रणाली के तहत यह भी सुनिश्चित होगा कि अधिकारी छुट्टी पर होने पर उनके ड्यूटी पर मौजूद सहकर्मी द्वारा कॉल का जवाब दिया जाए।

ऐसी तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर और जवाबदेह संवाद स्थापित हो और जनता के मुद्दों का त्वरित समाधान हो।


कठोर निर्देश और संभावित कार्रवाई

सभा अध्यक्ष सतीश महाना तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि:

  • फोन न उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • निर्देश दिए गए हैं कि अधिकारियों को जनता के चुने गए प्रतिनिधियों के फोन को प्राथमिकता देनी होगी।
  • यह कदम प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष की भूमिका

विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोर-शोर से उठाया है और कहा है कि:

  • कई बार अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाते हैं या वापस नही करते, जिससे जनहित के कार्य प्रभावित होते हैं।
  • इस व्यवहार को लोकतंत्र विरोधी बताया गया है, और जवाबदेही के लिए अब सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की गई है।

आगे की राह

उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी और जल्द ही सभी जिलों में कमांड सेंटर और संवाद सेतु सिस्टम एक्टिव कर दिए जाएंगे। इससे अधिकारी, विधायक और जनता के बीच पारदर्शी संवाद स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।