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प्रयागराज | 18 जनवरी 2026
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 में श्रद्धा और आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर पुण्य स्नान के लिए उमड़ पड़े। चारों ओर “हर-हर गंगे” और “जय संगम” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखते हुए किया गया संगम स्नान आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इसी आस्था के कारण देश के कोने-कोने से साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रयागराज पहुंची।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां
भारी जनसमूह को देखते हुए मेला प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए। अतिरिक्त पुलिस बल, एनडीआरएफ की टीमें, सीसीटीवी निगरानी, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा शिविर और सुचारु यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासन की अपील पर श्रद्धालुओं ने भी अनुशासन का पालन करते हुए शांतिपूर्वक स्नान किया।
साधु-संतों और अखाड़ों की उपस्थिति
संगम तट पर विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्नान किया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और भजन-कीर्तन ने पूरे मेला क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
आस्था, अनुशासन और उत्सव का संगम
मौनी अमावस्या का यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, एकता और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। माघ मेले का यह दिन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
माघ मेला 2026 में आगामी प्रमुख स्नान पर्वों को लेकर भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।