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चालक की सिर कटी लाश के मामले में पुलिस ने खुलासा कर दो को किया गिरफ्तार

एक फरार आरोपी की तलाश जारी, पिकअप लूटने के चक्कर में की गई हत्या

आजमगढ़/संसद वाणी : जनपद आजमगढ़ के रौनापार थाना के रोहुआर में एक दिन पूर्व महराजगंज जिला के निवासी पिकअप वाहन चालक की जमीन में दफन कर मिली सिर कटी लाश के मामले में पुलिस ने खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि एक मुख्य आरोपी शंकर कनौजिया फरार है, पुलिस जिसकी तलाश कर रही है। इस पर पुलिस ने 25 हजार का इनाम भी घोषित किया है। घटना का कारण पिकअप वाहन लूटना बताया जा रहा है।

आजमगढ़ जिले के जीयनपुर कोतवाली में मृतक के परिजन ने 11 जुलाई को अपने पिता चालक शैलेंद्र सिंह के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस कार्रवाई करते हुए 10 दिन पूर्व गायब हुए पिकअप ड्राइवर की सिर कटी लाश को एक दिन पूर्व बरामद किया। एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में पुलिस टीम, सर्विलांस व अन्य तकनीकी तरीके से जांच पड़ताल में जुटी थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि हम लोगों ने पिकप वाहन की व्यवस्था के लिए फर्जी कागज तैयार करने की योजना बनाई। इसी के तहत गोरखपुर से एक हजार में एक गाड़ी बुक कराई और ड्राईवर शैलेन्द्र सिंह से कहा कि फर्नीचर का सामान लाना है। जब हमारी व्यवस्था हो जायेगी तो हम आपसे सम्पर्क करेंगें। 3 जुलाई को शैलेन्द्र की गाड़ी को भाड़े पर ले जाने के लिए आजमगढ़ के लाटघाट बुलाया।

ड्राइवर के आने पर उसे खाद्य पदार्थ में जहरीला पदार्थ मिलाकर खिला दिया गया कुछ देर में वह अचेत हो गया। तब दोनों ने उसे फावड़े/बांका से काटकर गड्ढा खोदकर मकान के पीछे हाते में गर्दन के निचले हिस्से धड़ को मिट्टी में गाड़ दिया। लाश से बदबू न आये इसलिए नमक डालकर घास फुस व मिट्टी से ढ़क दिया। जबकि सिर को शंकर कनौजिया कहीं ले गया। पुलिस लाइन सभागार में आज पुलिस अधीक्षक ने खुलासा करते हुए बताया कि इस घटना में शामिल रामछवि उर्फ छबिया मऊ जिले के दोहरीघाट का हिस्ट्रीशीटर है। आरोपी पर 59 मुकदमें दर्ज हैं। जबकि दूसरा आरोपी छांगुर जीयनपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। इस मामले में एक आरोपी शंकर कनौजिया फरार चल रहा है। जिसकी तलाश कर जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त तमंचा, फावड़ा, दो मोबाइल, पिकप वाहन भी बरामद किया है।

लोकसभा में भाजपा और NDA सरकार को घेरने के लिए बनी खास टीम, ‘जाने किस-किस को मिली जगह?

Congress Lok Sabha Leadership Team: कांग्रेस ने संसद के निचली सदन यानी लोकसभा में भाजपा और NDA सरकार को घेरने के लिए अपनी खास रणनीति के तहत टीम बनाई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का साथ देने के लिए टीम में एक उपनेता, मुख्य सचेतक और दो सचेतकों की नियुक्ति की गई है. टीम में ओबीसी, दलित और मुस्लिम नेताओं को शामिल कर सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की पूरी कोशिश भी की गई है.

Congress Lok Sabha Leadership Team: लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने लोकसभा नेतृत्व टीम बनाई है. टीम में दो ओबीसी नेता, एक दलित और एक मुस्लिम नेता को शामिल किया गया है, जो लोकसभा में राहुल गांधी का साथ देंगे. कांग्रेस ने इन नेताओं की उपनेता, मुख्य सचेतक और सचेतक के रूप में नियुक्ति की है. 

कांग्रेस ने जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई को लोकसभा में अपना उपनेता, मवेलिक्कारा के सांसद के. सुरेश को मुख्य सचेतक और विरुद्धनगर के सांसद मणिकम टैगोर, किशनगंज के सांसद मोहम्मद जावेद को निचले सदन में सचेतक नियुक्त किया है. इनकी नियुक्ति कर कांग्रेस ने जातियों, समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया है.

सुरेश केरल के दलित नेता हैं, जबकि टैगोर तमिलनाडु के ओबीसी नेता हैं. मोहम्मद जावेद बिहार से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम नेता हैं. वहीं, गौरव गोगोई असम से हैं, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से हैं.

कांग्रेस के एक सीनियर सांसद ने कहा कि ये स्पष्ट है कि पार्टी ने विभिन्न समुदायों और राज्यों के नेताओं को शामिल किया है, जिसका उद्देश्य विभिन्न स्थानों, जातियों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देना है. चूंकि, लोकसभा में उत्तर प्रदेश के रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी हमारे नेता हैं, इसलिए हमने व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लोगों को शामिल किया है. नियुक्तियों से यह भी पता चलता है कि वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व की बात करें तो पार्टी अपनी बात पर खरी उतरती है.

केसी वेणुगोपाल ने नियुक्तियों की घोषणा की

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इन नियुक्तियों की घोषणा की. वेणुगोपाल ने रविवार को कहा कि कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को को पत्र लिखकर नियुक्तियों के बारे में सूचित किया है.

वेणुगोपाल ने नवनियुक्त सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस और भारतीय पार्टियां लोकसभा में जनता का पक्ष पूरी ऊर्जा के साथ रखेंगी. 

गौरव गोगोई

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे 41 साल के गौरव पिछली लोकसभा में भी कांग्रेस के उपनेता थे. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने मौजूदा भाजपा सांसद तपन कुमार को हराया था. गौरव गोगोई ने जोरहाट लोकसभा सीट पर 1.44 लाख वोटों से जीत हासिल की है.

कलियाबोर से चुनाव लड़ने वाले गौरव गोगोई ने इस बार जोरहाट से चुनाव लड़ा था, क्योंकि पिछले साल परिसीमन की वजह से कलियाबोर लोकसभा क्षेत्र बदल गया था, जो उनके परिवार का गढ़ था. गौरव की नियुक्ति से पार्टी को मणिपुर मुद्दे को सदन में उठाने में मदद मिलेगी. साथ ही, यह भी उम्मीद है कि वे निचले सदन में पूर्वोत्तर की कांग्रेस की आवाज बनेंगे.

के सुरेश

18वीं लोकसभा के गठन के बाद से ही सुरेश चर्चा में रहे हैं. सदन के सबसे सीनियर मेंबर होने के बावजूद प्रोटेम स्पीकर के पद के लिए उनकी अनदेखी किए जाने के बाद वे विवादों के केंद्र में थे. कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की नियुक्ति परंपरा के खिलाफ है.

केरल के रहने वाले 62 साल के कांग्रेस नेता सुरेश आठ बार सांसद रह चुके हैं और उन्होंने मावेलिक्कारा और अदूर की तत्कालीन लोकसभा सीट का चार-चार बार प्रतिनिधित्व किया है. वे पहली बार 1989 में निचले सदन के लिए चुने गए थे और 2009 से मावेलिक्कारा सीट पर काबिज हैं.

लोकसभा चुनाव 2024 में उन्होंने सीपीआई के  सीए अरुण को 10,000 वोटों से हराया. उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री भी रहे हैं. वे AICC के सचिव भी रह चुके हैं.

मणिकम टैगोर

तमिलनाडु के विरुद्धनगर से तीन बार सांसद रहे 49 साल के टैगोर पिछली लोकसभा में भी पार्टी के सचेतक थे. हाल के चुनावों में उन्होंने डीएमडी के केवी विजय प्रभाकरन को 4,379 मतों से हराया था.

टैगोर ने NSUI से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. वे कांग्रेस में कई प्रमुख पदों पर काम कर चुके हैं. राहुल गांधी के विश्वासपात्र माने जाने वाले टैगोर ने हाल ही में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कांग्रेस के साथ अन्याय किया है.

मोहम्मद जावेद

चार बार विधायक और 2000 से 2004 तक बिहार सरकार में मंत्री रहे 61 साल के मोहम्मद जावेद ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 2004 में बिहार की समस्तीपुर सीट से लड़ा था. लोकसभा चुनाव 2024 में उन्होंने जेडी(यू) के मुजाहिद आलम को 59,000 से ज़्यादा वोटों से हराया. उनके पिता मोहम्मद हुसैन आज़ाद छह बार विधायक और बिहार में कई बार मंत्री रह चुके हैं.

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि किसी मुस्लिम को ऐसा पद देना दिखाता है कि पार्टी देश के अल्पसंख्यकों के साथ खड़ी है. ये लगातार चार बार कांग्रेस के सांसद चुनने के लिए किशनगंज के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका भी हो सकता है.

असम के सीएम ने फ़िर अलापा सीएए का राग,बोले -‘2015 के बाद आए असम तो भगा दूंगा’ 

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर से सीएए के बारे में बोलते कहा कि जो व्यक्ति 2015 से पहले भारत आया है तो उसे नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार है. साथ ही उन्होंने कहा कि हम 2015 के बाद आए लोगों को की पहचान कर उनपर एक्शन लेंगे.

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर से सीएए का राग अलापा है. सीएम हिमंत ने कहा कि अब तक सिर्फ़ दो लोगों ने आवेदन किया है. कोई भी व्यक्ति (सीएए के अनुसार) जो 2015 से पहले भारत आया है, उसे नागरिकता के लिए आवेदन करने का पहला अधिकार है. अगर वे आवेदन नहीं करते हैं तो हम उनके लिए मामला दर्ज करेंगे.

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इसके लिए निर्देश जारी किए गए हैं.  हम 2015 के बाद आए लोगों को निर्वासित करेंगे. अब तक सिर्फ़ दो लोगों ने आवेदन किया है जो 2015 से पहले आए थे. पांच आवेदनों में से तीन सुनवाई में मौजूद नहीं थे और सिर्फ़ दो ने सीएए के लिए आवेदन किया है.

मैं सबसे पहले इस्तीफा दे दूंगा…

केंद्र सरकार द्वारा सीएए नियमों को अधिसूचित करने के एक दिन बाद  असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अगर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के लिए आवेदन नहीं करने वाले एक भी व्यक्ति को नए लागू कानून के तहत नागरिकता प्रदान की जाती है, तो वह अपने पद से इस्तीफा देने वाले पहले व्यक्ति होंगे. शिवसागर में एक कार्यक्रम के दौरान हिमंत ने कहा मैं असम का बेटा हूं और अगर एनआरसी के लिए आवेदन नहीं करने वाले एक भी व्यक्ति को नागरिकता मिल जाती है, तो मैं सबसे पहले इस्तीफा दे दूंगा.

हिमंत ने कहा कि सीएए कोई नया कानून नहीं है, इसे पहले भी लागू किया गया था. उन्होंने लोगों से निर्धारित पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने का आग्रह किया और कहा कि इसके विरोध में सड़कों पर उतरने का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा पोर्टल पर मौजूद आंकड़े अब बोलेंगे और यह स्पष्ट हो जाएगा कि कानून का विरोध करने वालों के दावे तथ्यात्मक रूप से सही हैं या नहीं.

विपक्ष करने वाला है प्रदर्शन

इस बीच असम पुलिस ने विपक्षी दलों को नोटिस जारी किया है, क्योंकि उन्होंने सीएए के लागू होने के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन बुलाया है. नोटिस में पार्टियों को हड़ताल वापस लेने और राज्य में शांति बनाए रखने में सहयोग करने का आदेश दिया गया है, साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर वे आदेश का पालन करने में विफल रहे तो उनके खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

मनीष सिसोदिया को कोर्ट नहीं मिली राहत, बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत

राउज़ ऐवन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। बता दें कि सोमवार को मनीष सिसोदिया को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया था।

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कोर्ट से एक बार फिर से झटका लगा है। दिल्ली शराब नीति से जुड़े CBI के मामले में राउज़ ऐवन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 22 जुलाई तक बढ़ा दी है। बता दें कि मनीष सिसोदिया को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया था। राउज ऐवन्यू कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। 

सुप्रीम कोर्ट का भी खटखटाया है दरवाजा

हाल ही में दिल्ली शराब घोटाला मामले में जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से निराश हुए दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने सीबीआई और ईडी मामले में जमानत की मांग करते हुई दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। 

बीते साल गिरफ्तार हुए थे सिसोदिया

आपको बता दें कि दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया को बीते साल दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई ने 26 फरवरी और 9 मार्च को ED ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्होंने केजरीवाल की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल सिसोदिया तिहाड़ जेल में बंद हैं।

अब अंतरिक्ष में इंसानों के लिए घर बनाएगा भारत, इस कंपनी ने शुरू कर दिया काम

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Plans to build settlements in space: भारत की स्पेस कंपनियों ने अंतरिक्ष में बस्तियां बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। भारत की स्पेस पिक्सल कंपनी ने इसके लिए उन क्षुद्र ग्रहों की तलाश भी शुरू कर दी है, जिसके जरिये इस कार्य को अंतरिक्ष में अंजाम दिया जाना है।

वह दिन दूर नहीं, जब भारत अंतरिक्ष में इंसानों के लिए बस्तियां बना देगा। भले ही यह अभी सपने जैसा है, लेकिन बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप पिक्सेल स्पेस ने इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया है। कंपनी ने पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का अपना समूह तैयार कर चंद्रमा और क्षुद्रग्रहों का मानचित्रण करने और बाहरी अंतरिक्ष में बस्तियां बनाने के लिए आवश्यक सामग्री की तलाश करने की योजना बनाई है। पिक्सेल स्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) अवैस अहमद ने स्टार्टअप की दीर्घकालिक योजनाओं के बारे में बताया और इनमें अंतरिक्ष में भविष्य की बस्तियों के लिए निर्माण सामग्री या संभावित ईंधन स्रोत खोजने के इरादे से क्षुद्रग्रहों की खोज का शामिल होना बताया है।

अहमद ने कहा, ‘‘हम ‘हाइपर-स्पेक्ट्रल’ कैमरे बना रहे हैं जो पृथ्वी को देखते हैं। उन्हीं कैमरों को अंतरिक्ष में अन्य वस्तुओं को देखने के लिए बाहर की ओर घुमाया जा सकता है। हम इन अंतरिक्ष यान को चंद्रमा, मंगल या क्षुद्रग्रह क्षेत्र में भेज सकते हैं, और सौर मंडल एक नक्शा बना सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि स्टार्टअप पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह का अधिक विस्तार से पता लगाने के लिए उपग्रहों को चंद्रमा के चारों ओर की कक्षाओं में भी स्थापित करना चाहेगा। अहमद ने कहा, ‘‘हम मंगल और बृहस्पति के बीच क्षुद्रग्रह क्षेत्र में जा सकते हैं और पहचान सकते हैं कि इनमें से कौन से क्षुद्रग्रह आश्चर्यजनक तथा बेकार हैं, और उनमें से कौन सी कुछ बहुमूल्य सामग्रियां हैं जो अंतरिक्ष में उपयोगी हो सकती हैं।’’

क्षुद्रग्रहों पर बर्फ की तलाश

अहमद ने कहा कि उपग्रह क्षुद्रग्रहों पर बर्फ की तलाश कर सकते हैं जिसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है तथा पानी के रूप में भी संग्रहीत किया जा सकता है।  ‘‘इसलिए, जब मानवता अंतरिक्ष की ओर बढ़ रही है तो पृथ्वी से सारी सामग्री निकालने का कोई मतलब नहीं है, जबकि अंतरिक्ष में वास्तव में बहुत अधिक सामग्री उपलब्ध है।’’ उन्होंने कहा कि एलन मस्क की स्पेसएक्स अंतरिक्ष क्रांति के लिए रेलमार्ग के निर्माण पर तथा अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन और अन्य अंतरिक्ष के लिए आवास निर्माण पर काम कर रही हैं।

अहमद ने कहा, ‘‘हम यह सब संभव करने के लिए सामग्री उपलब्ध कराने वाले बनना चाहते हैं। लेकिन बहुत दीर्घकालिक दृष्टिकोण है।’’ पिक्सेल स्पेस ने पृथ्वी का अधिक विस्तार से मानचित्रण तैयार करने के लिए अपने उपग्रह समूह के हिस्से के रूप में इस साल के अंत में छह ‘हाइपर-स्पेक्ट्रल’ उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है। अगले वर्ष 18 अन्य उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाएगा जो पृथ्वी की निचली कक्षा में बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप के उपग्रह समूह को पूरा करेंगे। 

के पी शर्मा ओली ने बने नेपाल के प्रधानमंत्री, एक महीने में हासिल करना होगा विश्वास मत

के पी शर्मा ओली चौथी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने सोमवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने रविवार को के पी शर्मा ओली को नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।

काठमांडू: के पी शर्मा ओली ने सोमवार को चौथी बार नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। बता दें कि नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता को राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने रविवार को एक नई गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने के लिए नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जो हिमालयी राष्ट्र में राजनीतिक स्थिरता प्रदान करने की कठिन चुनौती का सामना कर रही है। 72 वर्षीय ओली, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ का स्थान लेंगे, जो शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हार गए। जिसके बाद अब के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ।

नेपाली कांग्रेस का मिला समर्थन

के पी शर्मा ओली संसद में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने हैं। ओली को राष्ट्रपति पौडेल ने राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन शीतल निवास में शपथ दिलाई। ओली को अब संवैधानिक आदेश के अनुसार नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर संसद से विश्वास मत हासिल करना होगा। 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा (एचओआर) में ओली को न्यूनतम 138 वोटों की आवश्यकता होगी।

चीन समर्थक माने जाते हैं ओली 

बता दें कि इससे पहले भी के पी शर्मा ओली नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वहीं पहले के कार्यकाल के दौरान के पी शर्मा ओली के रिश्ते भारत के साथ बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। के पी शर्मा ओली चीन के समर्थक माने जाते हैं। ओली के पीएम रहने के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का विवाद काफी गंभीर हो गया था। ओली ने भारत के इन क्षेत्रों पर नेपाल का दावा ठोंक दिया था। ऐसे में माना जा रहा है कि ओली के फिर से सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा दोबारा दोनों देशों के बीच तनाव की वजह बन सकता है।

बढ़ सकती हैं इमरान खान की मुश्किलें, होगा सियासत का अंत, PTI पर भी बैन लगाएगी शरीफ सरकार

Imran Khan PTI Ban in Pakistan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ने वाली है। शरीफ सरकार ने खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी पर राज्य विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में प्रतिबंध लगाएगी। सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी। ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ की खबर के अनुसार, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि संघीय सरकार ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है।

PTI के खिलाफ हैं सबूत

तरार ने कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्पष्ट सबूत उपलब्ध हैं और सरकार पार्टी के खिलाफ कार्यवाही शुरू करेगी। उच्चतम न्यायालय के आरक्षित सीट मामले में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और खान को गैर कानूनी शादी के मामले में राहत देने की पृष्ठभूमि में सरकार का यह निर्णय आया है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग मामला, 9 मई के दंगे, सिफर प्रकरण और अमेरिका में पारित प्रस्ताव को देखते हुए हमारी सरकार मानना है कि पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए लिए ये बहुत विश्वसनीय सबूत हैं।

आर्टिकल 6 लगाने का ऐलान

पाकिस्तान सरकार ने पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही इमरान खान, पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और पूर्व उप सभापति कासिम सूरी के खिलाफ आर्टिकल 6 लगाने का भी ऐलान किया है। आर्टिकल 6 के तहत मामले में मौत की सजा हो सकती है। इससे उनके भविष्य में चुनाव लड़ने पर भी संकट हो सकता है। इमरान खान पर आतंकवाद के आरोप में नए मामले भी दर्ज किए गए हैं। 

‘आतंकवादी जैसी हैं हरकतें’

बता दें कि, हाल ही में पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने बड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि 9 मई की हिंसा से जुड़े मामले में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हरकतें एक ‘‘आतंकवादी’’ के समान थीं। अदालत ने यह भी कहा था कि उन्होंने अपनी रिहाई के लिए दबाव बनाने के वास्ते पार्टी नेताओं को सैन्य प्रतिष्ठानों, सरकारी संपत्तियों और पुलिस अधिकारियों पर हमला करने का काम सौंपा।

ऑनलाइन अटेंडेंस के विरोध में जिले के बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतरे, सरकार मांगे पूरी कर दे हम अटेंडेंस को तैयार

आजमगढ़/संसद वाणी : जनपद आजमगढ़ में ऑनलाइन अटेंडेंस के विरोध में जिले के बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालय के शिक्षक कुंवर सिंह उद्यान में पहुंचकर विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार जिस तरह से हम लोगों को ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए बाध्य कर रही है निश्चित रूप से दुखद है। यही कारण है कि हम लोग अपनी बात को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि हमारी चार मांगे हैं, जिन्हें सरकार पूरा कर दे। हम ऑनलाइन अटेंडेंस के विरोध में नहीं हैं।

प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में 8 जुलाई से शिक्षकों और कर्मचारियों की डिजिटल अटेंडेंस लगाने का निर्देश दिया। जिसके विरोध में परिषदीय स्कूल के शिक्षक लगातार लाबबंद रहे, जिसके चलते ऑनलाइन हाजिरी का परसेंटेज बहुत न्यूनतम रहा। शासन ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षक अपनी उपस्थिति डिजिटल पद्धति से करेंगे। वहीं इस मामले को लेकर पूरा शिक्षक वर्ग विरोध कर रहा है। शिक्षकों की सरकार से मांग है कि 30 EL और 15 हाफ CL दिया जाये। इसके साथ ही राज्य कर्मचारियों की तरह शिक्षकों को भी कैशलेस की चिकित्सा सुविधा दी जाए। ऑनलाइन अटेंडेंस की पूरी गाइडलाइन पुरी की जाये। इन चारों मांगों को सरकार पूरी कर दें, हम ऑनलाइन अटेंडेंस का सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। वहीं इस बारे में शिक्षिका निशा राय ने कहा कि जिले में जितने भी स्कूल है सभी स्कूल सड़कों पर नहीं है। कभी जाम के कारण तो कभी किसी समस्या के कारण स्कूलों में पहुंचने में देर हो जाती है। यदि सरकार हम लोगों को उसी हिसाब से सुरक्षा दें और हमारी जो मांग है, इस पूरी करें।

हम सभी शिक्षकों की संवेदनाओं को सरकार को समझना चाहिए। शिक्षिका सुषमा सिंह ने बताया कि ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर ऐसा नियम बनाया गया है उसमें पूरा वेतन काटा जाएगा जो निश्चित रूप से दुखद है। ऐसे में हमारी मांग है कि हमारी समस्याओं का समाधान किया जाए हम लोग ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए तैयार हैं। शिक्षकों ने बताया कि हम डिजिटल अटेंडेंस का विरोध नहीं कर रहे लेकिन जिस तरह से लागू किया जा रहा है उसका विरोध कर रहे है। खराब मौसम में, अपने बच्चे की तबियत खराब होने की स्थिति में कैसे अटेंडेंस लगा पाएंगे, इसमें सुधार हो। दूसरे शिक्षक नेता ने शिक्षको के हित की अन्य मांगों को लेकर डिजिटल अटेंडेंस के विरोध करने की बात कही।

ट्रंप पर हुआ हमले से बदल जाएगी अमेरिका में चुनावी हवा, जानिए किसे होगा सियासी फायदा?

Explainer: क्या ट्रंप पर हुआ हमला बदल देगा अमेरिका में चुनावी हवा, जानिए किसको मिलेगा सियासी फायदा?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुआ जानलेवा हमला चुनावी कैंपेन की दिशा बदल सकता है। चेहरे पर खून, गोली लगने के बाद प्रतिरोध में अपनी मुट्ठी उठाते हुए ट्रंप की तस्वीरें चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं।

अमेरिका में इसी साल नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होना है। ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले का चुनाव पर क्या असर होगा इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। ट्रंप पर हुए हमले ने अमेरिका में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। इसके साथ ही सीक्रेट सर्विस की सिक्योरिटी व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पूर्व राष्ट्रपति की रैली से महज 200 मीटर के अंदर की इमारत कैसे सुरक्षा एजेंसियों के दायरे में नहीं आई। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति पर शनिवार को हुए जानलेवा हमले के कुछ अलग निष्कर्ष निकालना अपने आप में दिलचस्प है। तो चलिए इस हमले के विभिन्न पहलुओं पर नजर डालते हुए यह जानते हैं कि आखिर इससे किसे सियासी लाभ मिलने वाला है। 

बदल रही चुनावी कैंपेन की दिशा?

डोनाल्ड ट्रंप पर हुआ जानलेवा हमला अमेरिकी चुनावी कैंपेन को नई दिशा दे सकता है। बाइडेन की उम्मीदवारी को लेकर घिरे डेमोक्रेट्स प्रशासन के ऊपर ये हमला सवालों को और तीखा कर सकता है। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब इतना अहम नेता अमेरिका में सुरक्षित नहीं है तो फिर कौन सुरक्षित है। हमले के तुरंत बाद खून से लथपथ चेहरे वाली ट्रंप की तस्वीर को बेटे एरिक ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और लिखा- ‘This is the fighter America needs’ साफ है कि अब अमेरिका में सियासी मुद्दा क्या होने वाला है। ट्रंप पर हुई गोलीबारी की घटना खतरनाक तो है, लेकिन अमेरिकी इतिहास या यहां तक ​​कि राष्ट्रपति चुनाव के वर्तमान अभियान के संदर्भ में भी पूरी तरह से हैरान करने वाली नहीं है।

आम लोगों पर पड़ता है असर

अमेरिका में राजनीतिक पार्टियों की ओर से जिस तरह की बयानबाजी देखने को मिल रही है उसका असर आम लोगों पर भी पड़ता है। अमेरिका में देखा गया है कि मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देने के बजाय अक्सर दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ वोट करने के लिए प्रेरित हो जाते हैं। अब ऐसे में जब राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं तो दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता मतदाताओं की भावनाओं को भड़का कर गोलीबारी की इस घटना का फायदा उठाने की कोशिश करते हुए नजर आएंगे। गन कल्चर भी अब चुनाव में बड़ी मुद्दा बन सकता है।  

दोनों दलों के पास है अवसर

ट्रंप पर गोलीबारी से पहले सर्वेक्षणों से संकेत मिला था कि बाइडेन के चुनाव हारने की संभावना है। गोलीबारी की घटना से ट्रंप को सियासी लाभ मिल सकता है। ट्रंप के समर्थक इसे एक जीत की तरह प्रस्तुत करेगें जिससे उनकी छवि को भी चमकाने का अवसर मिलेगा। इस बीच ट्रंप पर हमला अब डेमोक्रेट्स के लिए अपने अभियान को रीसेट करने और अमेरिकी मतदाताओं से शांति और राष्ट्रीय एकता के लिए व्यापक अपील करने का एक नया अवसर भी है। चेहरे पर खून लगा हुआ, गोली लगने के बाद प्रतिरोध में अपनी मुट्ठी उठाते हुए ट्रंप की तस्वीरें चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं। 

तेज हो सकती है बयानबाजी

रिपब्लिकन और ट्रंप समर्थकों को अब एक अलग चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। गोलीबारी का फायदा उठाने की लालसा मुश्किल भी बढ़ा सकती है। कुछ ट्रंप समर्थक पहले से ही इस घटना के लिए डेमोक्रेट्स को दोषी ठहरा रहे हैं, जैसे कि रिपब्लिकन सीनेटर जेडी वेंस, जिन्हें ट्रंप के उपराष्ट्रपति पद के लिए सबसे आगे माना जाता है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन और अन्य लोगों ने भी हत्या से पहले यह कहने के लिए बाइडेन की आलोचना की है कि वह ‘ट्रंप को निशाने’ पर रखेंगे। गोलीबारी का राजनीतिकरण करने से ट्रंप समर्थकों की संख्या बढ़ाने में सफलता मिल सकती है, लेकिन इससे बयानबाजी भी तेज हो सकती है।

ट्रंप के पास है मौका 

वैसे ट्रंप के पास अब नेतृत्व दिखाने और मतदाताओं से व्यापक अपील करने का अवसर है। लेकिन, गोलीबारी के बाद बाइडेन ने उनके स्वास्थ्य के बारे में चिंता व्यक्त करने और दुखद घटना पर चर्चा करने के लिए ट्रंप को फोन किया। बाइडेन की ट्रंप से बात मतदाताओं को कुछ अलग संदेश दे सकती है। कुछ भी हो अमेरिका में सियासी दल ट्रंप पर हुए हमले को अपनी-अपनी तरह से लोगों को बताएंगे। इसकी भयावहता को उजागर करेंगे। अब ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव में आने वाले दिन किस तरह के होने वाले हैं। 

गजब: समधी को समधन से हुआ प्यार, बच्चों की शादी से पहले दोनों घर से हुए फरार

दोनों परिवारों में मचा हड़कंप

कासगंज/संसद वाणी : उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है।यहां बेटे की शादी से पहले समधी(दूल्हे का पिता)का दिल अपनी समधन (दुल्हन की मां) पर आ गया।बातचीत के बाद समधी और समधन ऐन शादी से पहले घर से फरार हो गए।इसके बाद दोनों परिवारों में हड़कंप मच गया।दुल्हन के पिता ने समधी पर एफआईआर दर्ज करवाई है।ये मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

पूरा मामला जिले के गंज डुंडवारा थाना क्षेत्र का है।यहां एक गांव में रहने वाले पप्पू की बेटी की शादी शकील के बेटे से तय हुई थी।शकील का पप्पू के घर आना-जाना था।शादी की तय तारीख भी करीब आ रही थी,लेकिन इसी दौरान समधी ने ऐसा कांड कर डाला कि दोनों परिवार हैरान रह गए।शकील अपनी समधन मतलब पप्पू की पत्नी को भगा ले गया।समधी शकील 10 बच्चों का पिता है तो समधन 6 बच्चों की मां है। समधी और समधन दोनों घर से फरार हैं।

पीड़ित पप्पू ने आरोप लगाया है कि शकील उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर ले गया है।पप्पू ने शकील पर पत्नी का अपहरण करने की तहरीर दी है।पुलिस सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर जांच में जुटी है। क्षेत्र में इस घटना को लेकर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।समधी और समधन में प्रेम प्रसंग की बात सामने आ रही है।

पत्नी के गायब होने के मामले में पीड़ित पप्पू ने कहा कि मेरी पत्नी को शकील किडनैप करके ले गया है।मेरी बेटी का रिश्ता उसके बेटे के साथ होने वाला था।उसका घर आना-जाना था। इसी बीच वो बहाने से मेरी पत्नी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। पत्नी का अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।

सीओ विजय कुमार राणा ने बताया कि थाना गंज डुंडवारा का एक मामला सामने आया है।शिकायतकर्ता पप्पू ने 8 जून को सूचना दी कि उसकी पत्नी लापता है।सूचना पर तत्काल पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली।इसके बाद पप्पू द्वारा 11 जुलाई को पुनः प्रार्थना पत्र दिया गया,जिसमें गणेशपुर निवासी शकील को आरोपित किया गया कि वही उसकी पत्नी को भगा कर ले गया है।फिलहाल इस केस में नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।