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बजट 2026: स्वास्थ्य खर्च, इंश्योरेंस कटौती और टैक्स डिडक्शन्स पर विशेषज्ञों की राय

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नई दिल्ली, 26 जनवरी 2026

केंद्रीय बजट 2026–27 (Union Budget 2026) के पेश होने से पहले ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मेडिकल खर्च और स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) से जुड़े टैक्स कटौती/डिडक्शन में बदलाव स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन खंडों में सुधार से लोगों की जेब पर पड़े दबाव को कम करने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है


टैक्स डिडक्शन्स में बदलाव का असर

इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब और कटौती की उम्मीदें बनी हुई हैं, जिसमें खासकर धारा 80D (Section 80D) के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और मेडिकल खर्च की डिडक्शन को बजट में शामिल करने की मांग उठ रही है। वर्तमान में धारा 80D का लाभ मुख्यतः पुराने टैक्स रेजीम में सीमित है, जिससे नए टैक्स रेजीम के तहत बहुत से करदाताओं को स्वास्थ्य बीमा लेने का पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि इस व्यवस्था को दोनों टैक्स रेजीम में विस्तार देना चाहिए ताकि स्वास्थ्य खर्च को टैक्स से राहत मिल सके।

विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक और मध्यम वर्ग के लिए यह बदलाव अहम माना जा रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य खर्च और बीमा प्रीमियम की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कुछ सुझावों में धारा 80D की कटौती सीमा को ₹50,000 से ₹1 लाख तक बढ़ाने की भी बात की जा रही है, ताकि परिवार और बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा बेहतर हो सके।


ज्यादा स्वास्थ्य खर्च, कम राहत?

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का स्वास्थ्य बजट लगभग ₹99,800 करोड़ के आसपास रहा था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च जीडीपी के सापेक्ष अभी भी कम है। विशेषज्ञ चाहते हैं कि बजट 2026 में स्वास्थ्य पर खर्च का अनुपात बढ़ाया जाए ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर गंभीर बीमारियों तक बेहतर कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।

NATHEALTH जैसी स्वस्थ्य इंडस्ट्री संस्थाएं भी इस बात पर जोर दे रही हैं कि बजट में स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (NCD) के बोझ और रसोई स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने पर ज्यादा निवेश होना चाहिए


इंश्योरेंस सेक्टर की उम्मीदें

इंश्योरेंस सेक्टर के समुदायों का कहना है कि यदि बजट में इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए टैक्स राहत और GST रियायतें शामिल की जाएं, तो इससे न केवल बीमा सस्ता होगा बल्कि लोगों का स्वास्थ्य खर्च कम करने में मदद मिलेगी। पिछले कुछ सुधार जैसे कि GST में छूट ने कुछ राहत दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी राहत अभी भी नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रही है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण

  • टैक्स प्रोफेशनल्स का अनुमान है कि यदि धारा 80D का लाभ नए टैक्स रेजीम में भी उपलब्ध कराया जाए, तो यह लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे वे अप्रत्याशित मेडिकल खर्चों से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं।
  • बजट विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ टैक्स बदलाव से काम नहीं चलेगा — मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और दवा लागतों पर राहत भी जरूरी है
  • स्वास्थ्य इंडस्ट्री लीडर कहते हैं कि नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (जैसे मधुमेह, हार्ट डिज़ीज़) की बढ़ती दरों को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 को रोकथाम (Prevention) पर भी भरोसा बढ़ाना चाहिए

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