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बी.एस. कटरे की कुर्सी – म्हाडा में भ्रष्टाचार का “स्वप्नपूर्ति” मॉडल!

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कटाक्ष: महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) में एक नया “स्वप्नपूर्ति” मॉडल सामने आया है – और नहीं, यह गरीबों को घर देने का नहीं, बल्कि गंभीर आरोपों से घिरे अधिकारियों को कुर्सी बचाने का मॉडल है! नायक हैं हमारे बी.एस. कटरे, जिन्हें दहेज प्रताड़ना, आत्महत्या के लिए उकसाने, और कथित ₹40-50 लाख मासिक “ब्लैक मनी” के आरोप भी पद से नहीं हटा सके। जुलाई 2025 में पत्नी रेणुका की संदिग्ध आत्महत्या, FIR, जमानत – और फिर, ताली-थाली के साथ म्हाडा में वापसी! वाह, क्या सिस्टम है!

कुर्सी की जादुई ताकत

कटरे साहब की कुर्सी कोई साधारण कुर्सी नहीं – यह तो “जादुई सिंहासन” है, जो FIR, जांच, और जनता के गुस्से को भी पिघला देता है। सामना नगर, मालवणी की स्वप्नपूर्ति सोसायटी के निवासी चीख-चीखकर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कटरे साहब को क्या? उनकी डायरी में शिकायतें “गायब” हो जाती हैं। 1 अक्टूबर को एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा ने शिकायत भेजी, कार्यालय में पुष्टि हुई, लेकिन 7 अक्टूबर को कटरे का जवाब था – “पत्र? कौन सा पत्र?” शायद पत्र डाकखाने में “स्वप्नलोक” चला गया हो!

बालासाहेब भगत: “14 साल का अजेय योद्धा”

और फिर आते हैं मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी के “अजेय” अध्यक्ष बालासाहेब भगत – 14 साल से कुर्सी पर काबिज, जैसे कोई मध्यकालीन सम्राट! अवैध पार्किंग, रूम दलाली, NOC के लिए वसूली – भगत का “बिजनेस मॉडल” इतना मजबूत है कि ऑडिट में दोषी साबित होने के बाद भी कटरे ने उन्हें “निर्दोष” का तमगा दे दिया। बिल्डिंग 1D अब ऑटो रिक्शा स्टैंड है, और म्हाडा की जमीन पर अवैध कब्जा चल रहा है। निवासियों की जान खतरे में, लेकिन भगत और कटरे की जोड़ी को कौन हिलाए? शायद इन्हें “म्हाडा रत्न” से नवाजना चाहिए!

मुख्यमंत्री जी, यह कैसा सुशासन?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” का ढोल पीटते हैं, इस मामले में खामोश क्यों? क्या म्हाडा में कटरे के अलावा कोई और अधिकारी नहीं बचा? या कुर्सी का जादू इतना तगड़ा है कि जांच, FIR, और जनता की पुकार भी बेअसर? अगर कोई आम आदमी होता, तो अब तक जेल की सलाखों के पीछे “न्याय” की प्रतीक्षा कर रहा होता। लेकिन कटरे साहब तो सुनवाई कर रहे हैं, फैसले सुना रहे हैं – जैसे कोई सुपरहीरो, जिसके लिए कानून सिर्फ एक “सुझाव” है!

सिस्टम का “स्वप्नलोक”

मालवणी के निवासी पूछते हैं: “क्या यही कानून है?” जवाब है – हाँ, यही है हमारा “स्वप्नलोक” कानून, जहां शिकायतें गायब होती हैं, भ्रष्टाचार को क्लीन चिट मिलती है, और अधिकारी जमानत पर “कमबैक” करते हैं। कटरे और भगत की जोड़ी ने साबित कर दिया कि सिस्टम में “सुधार” सिर्फ भाषणों की शोभा है। शायद हमें अब #SuspendBSKatare नहीं, बल्कि #AwardBSKatare शुरू करना चाहिए – “सबसे बेशर्म बहाली” के लिए!

जनता की पुकार: अब तो जागो!

यह कटाक्ष नहीं, एक चेतावनी है। मालवणी के निवासियों की पुकार को अनसुना नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री जी, अगर सुशासन का वादा सच्चा है, तो कटरे को तत्काल सस्पेंड करें। ACB, ED, और पुलिस को जांच तेज करने का आदेश दें। और हाँ, म्हाडा को बताएं कि कुर्सी कोई “जागीर” नहीं, जिम्मेदारी है। जनता देख रही है – यह सिस्टम हिलना चाहिए, और अभी!

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