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नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज सोने के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि सोने की कीमत 1 लाख 20 हज़ार रुपये प्रति तोला तक पहुंचने का कारण आम जनता की मांग नहीं, बल्कि बीजेपी नेताओं का कालाधन को सोने में बदलने का ‘स्वर्णीकरण’ है। अखिलेश ने सरकार से सवाल किया कि क्या सोने के जमाखोरों पर कार्रवाई के लिए उनके पास कोई ड्रोन, दूरबीन या बुलडोजर नहीं है।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में भारत ने सोने और चांदी के आयात को लगभग दोगुना कर लिया, भले ही कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हों। यह बढ़ोतरी त्योहारों और करों से बचने के लिए बैंकों और ज्वैलर्स द्वारा स्टॉक जमा करने के कारण हुई है। आज, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए 1,18,640 रुपये तक पहुंच गई है, जो वैश्विक कारकों जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदों, कमजोर रुपये और मांग में उछाल से प्रभावित है।
अखिलेश ने कहा कि ग़रीब आदमी अब शादी-ब्याह में सोने की एक लौंग तक नहीं दे सकता, और चांदी भी उनकी पहुंच से बाहर हो गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि दाम बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था के किस नियम के तहत विलासी धातुओं की मांग बढ़ रही है, इसका खुलासा किया जाए।
हालांकि, बीजेपी समर्थकों और अन्य यूजर्स ने अखिलेश के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्धारित होती हैं, और दुबई व सऊदी अरब में भी यही दाम हैं। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “अमेरिका का विपक्ष तो ट्रंप पर सोने के दाम का आरोप नहीं लगा रहा, फिर भारत में बीजेपी को क्यों दोष दें?” इस बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी सीजन और वैश्विक मांग ने आयात को बढ़ावा दिया है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी इस मुद्दे को और गरमा रही है। जनता के बीच इस बहस का असर आने वाले दिनों में साफ होगा।
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