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ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो मध्य पूर्व से करीब 4,000 किमी दूर स्थित है। यह हमला ईरान की लंबी दूरी की मारक क्षमता का प्रदर्शन माना जा रहा है, हालांकि मिसाइलें निशाने पर नहीं पहुंचीं।
हमले का विवरण
ईरान ने इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिनमें से एक उड़ान के दौरान विफल हो गई और दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर से रोक लिया। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह मिडिल ईस्ट के बाहर ईरान का सबसे बड़ा हमला है। डिएगो गार्सिया पर B-52 बॉम्बर और अन्य रणनीतिक हथियार तैनात हैं।
ब्रिटेन की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन ने ईरान के इस हमले की कड़ी निंदा की है, इसे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम बताया। ब्रिटिश अधिकारियों ने ईरान को अराजकता फैलाने का आरोप लगाया, जैसा कि पहले इजरायल पर ड्रोन हमलों के बाद भी किया गया था। हाल ही में ब्रिटेन ने इस बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।
डिएगो गार्सिया का महत्व
यह चागोस द्वीपसमूह में स्थित रणनीतिक बेस हिंद महासागर में अमेरिका-ब्रिटेन की पकड़ मजबूत करता है। ईरान और चीन जैसे देशों पर नजर रखने के लिए उपयोगी, यह सैन्य उपकरणों का सुरक्षित भंडार है। ईरान की मिसाइलें जैसे खोर्रमशहर (2,000-3,000 किमी रेंज) ने इस हमले को संभव बनाया।
संभावित परिणाम
यह घटना मध्य पूर्व तनाव को वैश्विक स्तर पर फैला सकती है, खासकर ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच। अमेरिकी अधिकारियों ने कोई नुकसान न होने की पुष्टि की। विशेषज्ञ इसे ईरान की क्षमता दिखाने का प्रयास मान रहे हैं।