Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच और पूर्व सांसद गौतम गंभीर ने AI से बने डीपफेक वीडियो और उनकी पहचान के दुरुपयोग के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने ₹2.5 करोड़ हर्जाने की मांग की है।
याचिका के मुख्य बिंदु
गंभीर ने अपनी नाम, छवि, आवाज और व्यक्तित्व के बिना अनुमति इस्तेमाल पर स्थायी रोक लगाने की मांग की है। याचिका में AI-जनरेटेड फर्जी वीडियो, वॉयस क्लोनिंग और अनधिकृत मर्चेंडाइज की बिक्री का जिक्र है। कोर्ट से तत्काल सामग्री हटाने के निर्देश की भी अपील की गई है।
मामले का पृष्ठभूमि
2025 के अंत से गंभीर की पहचान का “समन्वित अभियान” चल रहा है, जिसमें डीपफेक से गलत सूचना फैलाई जा रही है और व्यावसायिक लाभ कमाया जा रहा है। गंभीर ने कहा, “मेरी पहचान को हथियार बनाकर दुरुपयोग किया जा रहा है।” यह AI युग में पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा का बड़ा मामला है।
प्रतिवादी और कानूनी आधार
याचिका में 16 प्रतिवादी हैं, जिनमें मेटा, X (पूर्व ट्विटर) और अमेज़न शामिल हैं। गंभीर ने कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क एक्ट 1999 और दिल्ली हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया है। पर्सनैलिटी राइट्स को कानूनी संरक्षण देने पर जोर दिया गया।
महत्वपूर्ण प्रभाव
यह केस AI डीपफेक के बढ़ते खतरे पर रोशनी डालता है, खासकर सार्वजनिक हस्तियों के लिए। T20 वर्ल्ड कप 2026 जीत के ठीक बाद दायर यह याचिका डिजिटल सुरक्षा पर बहस छेड़ सकती है। कोर्ट की सुनवाई से सेलिब्रिटी राइट्स को नई दिशा मिल सकती है।