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मुंबई/संसद वाणी।
संसद वाणी की ग्राउंड रिपोर्टिंग में मलाड वेस्ट के लिंक रोड क्षेत्र में फुटपाथ पर हो रही कथित अवैध पार्किंग का मामला एक बार फिर सामने आया है। कई दिनों से इस मुद्दे को लगातार उठाने और संबंधित विभागों को शिकायत देने के बावजूद स्थिति में कोई ठोस बदलाव देखने को नहीं मिला है।
मामला जैन सबकुछ फूड प्लाजा के बाहर फुटपाथ पर पार्किंग से जुड़ा है, जहाँ आज भी वाहनों को फुटपाथ पर खड़ा किया जा रहा है। इसके अलावा आसपास के कार शोरूम और अन्य रेस्टोरेंट्स के बाहर भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है।
कार्रवाई के दावे बनाम जमीनी सच्चाई
मुंबई RTO की ओर से बार-बार यह कहा गया कि शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की गई है।
लेकिन जब इस कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी या प्रमाण मांगे गए, तो कोई ठोस विवरण सामने नहीं आया।
वहीं, संसद वाणी की टीम द्वारा मौके पर की गई पड़ताल में पाया गया कि—
👉 फुटपाथ पर आज भी वाहन खड़े हैं
👉 पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है
👉 “नो पार्किंग” संकेतों के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा
20 दिनों से उठ रहा मुद्दा, परिणाम शून्य
इस मुद्दे को लेकर पिछले 20 दिनों से अधिक समय से लगातार शिकायतें और समाचार प्रकाशित किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद न तो स्थायी समाधान हुआ है और न ही नियमित कार्रवाई दिखाई दी है।
सवालों के घेरे में विभाग
इस पूरे मामले में मुंबई RTO और गोरेगांव ट्रैफिक डिवीजन की भूमिका को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
👉 यदि कार्रवाई की गई है, तो उसका स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
👉 क्या कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित है?
👉 यदि नियम लागू हैं, तो फुटपाथ पर पार्किंग अब भी क्यों जारी है?
👉 क्या कुछ स्थानों पर नियमों का पालन अलग तरीके से किया जा रहा है?
VIP क्षेत्रों पर ढील?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर बड़े प्रतिष्ठान या व्यावसायिक गतिविधियाँ अधिक हैं, वहाँ नियमों के पालन में ढील नजर आती है।
हालांकि इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर असर
फुटपाथ पर अतिक्रमण और पार्किंग के कारण आम नागरिकों को सड़क से गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
फुटपाथ, जो पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए हैं, उनका उपयोग यदि पार्किंग के रूप में होता है, तो यह शहरी व्यवस्था पर सीधा असर डालता है।
निष्कर्ष: अब जवाब जरूरी
यह मामला अब केवल अवैध पार्किंग का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का बन गया है।
अब देखना यह है कि—
👉 क्या संबंधित विभाग नियमित और सख्त कार्रवाई करेगा?
👉 या फिर यह मामला भी दावों और हकीकत के बीच ही उलझा रहेगा?