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नई दिल्ली, 24 मार्च 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज विश्व टीबी दिवस के अवसर पर “टीबी उन्मूलन अभियान – 100 दिन का सघन कार्यक्रम” को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। यह अभियान भारत को 2027 तक टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को तेज़ी से आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और जागरूकता को देशभर में गहराने पर केंद्रित है।
अभियान की मुख्य विशेषताएँ
जेपी नड्डा ने लॉन्च के दौरान कहा कि भारत 2027 तक टीबी मुक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को अब “मिशन‑मोड” में ले जा रहा है। अभियान के प्रमुख बिंदु:
- निशुल्क जांच और दवाएँ: हर जिले में मोबाइल TB यूनिट्स तैनात की जाएँगी, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक निशुल्क जांच और मुफ्त TB दवाएँ पहुँच सकें।
- डिजिटल ट्रैकिंग (Ni‑kshay पोर्टल):
- रोगियों का रियल‑टाइम सतत मॉनिटरिंग निक्षय (Ni‑kshay) पोर्टल पर की जाएगी।
- इससे उपचार की शुरुआत से लेकर पूरी अवधि तक का ट्रैक रहेगा, जिससे ट्रीटमेंट इंटरप्शन और ड्रॉप‑आउट कम होंगे।
- जागरूकता अभियान:
- स्कूलों, गाँवों, महानगरों और शहरी वार्ड स्तर पर जागरूकता कैंप आयोजित किए जाएँगे।
- सेलिब्रिटीज, स्थानीय नेता और स्वास्थ्य‑कार्यकर्ता “हर घर TB मुक्त” जैसे संदेशों के साथ लोगों को शुरुआती लक्षण पहचानकर तुरंत जांच करवाने के लिए प्रेरित करेंगे।
- नया लक्ष्य – 2027 तक टीबी उन्मूलन:
- अभियान 2025 के “टीबी‑मुक्त भारत” लक्ष्य को और मजबूत करता है और 2027 तक टीबी मामलों में नाटकीय कमी और उन्मूलन की दिशा में बढ़ने का निर्णय लेता है।
यह नया 100‑दिवसीय सघन अभियान “प्रधानमंत्री TB मुक्त भारत अभियान (Pradhan Mantri TB Mukt Bharat Abhiyan)” का ही विस्तार और डिजिटल‑सशक्त रूप है, जिसके तहत अब तक 10 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा पहुँच चुका है।
क्यों जरूरी है टीबी उन्मूलन?
भारत विश्व के सबसे ज्यादा टीबी मामलों वाले देशों में से एक है:
- हर साल लगभग 25–28 लाख टीबी केस दर्ज होते हैं, जो वैश्विक कुल मामलों का लगभग 27% है।
- COVID‑19 महामारी के बाद टीबी केस में थोड़ी वृद्धि हुई, लेकिन सरकार की “TB‑मुक्त भारत 2027” योजना, निक्षय पोषण योजना और डिजिटल ट्रैकिंग से कुछ सालों में मामलों में कमी देखी गई है।
जेपी नड्डा ने जोर दिया कि टीबी गरीबी और असमानता का दुश्मन है – उपचार और समर्थन से न केवल एक व्यक्ति, बल्कि उसका पूरा परिवार और कमजोर समाज‑समूह लाभान्वित होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस रणनीति से करोड़ों परिवारों पर आर्थिक और स्वास्थ्य स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय: वैश्विक मॉडल बन सकता है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि भारत का “टीबी उन्मूलन मिशन” दूसरे उच्च‑बोझ वाले देशों के लिए एक संभावित वैश्विक मॉडल बन सकता है।
- WHO के अनुसार, भारत की नई डिजिटल‑सहित रणनीति से टीबी के मामले 40% तक कम हो सकते हैं, यदि कार्यान्वयन में स्थानीय निर्णयन और जनभागीदारी बनी रहे।
- AIIMS जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों का मानना है कि नई दवाएँ, AI‑आधारित डायग्नोस्टिक टूल और डिजिटल‑ट्रैकिंग से 2027 तक लक्ष्य “संभव”, लेकिन कड़ी मेहनत के साथ उपलब्ध है।
आगे की राह: राज्य‑स्तरीय अमल और जनभागीदारी
- अभियान के तहत हर राज्य को टारगेटेड TB रिडक्शन और जांच‑लक्ष्य दिए गए हैं।
- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अलग‑अलग जिले‑स्तरीय “TB मुक्त जनसंकल्प अभियान” पायलट रूप में सफल रहे हैं, जिनसे जागरूकता और जांच दर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
- “हर घर TB मुक्त” जैसे जागरूकता अभियान गाँव और शहरी वार्डों में चलाए जाएंगे, ताकि लोग लक्षण छिपाने की बजाय जल्द रिपोर्ट करें।
जेपी नड्डा ने आमजन से “टीबी छुपाएं नहीं, रिपोर्ट करें” का आह्वान किया और कहा कि
“समय पर जांच और नियमित उपचार ही टीबी को खत्म करने का रास्ता है।”
अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल Ni‑kshay.gov.in और TB मुक्त भारत ऐप का उपयोग किया जा सकता है, जहाँ लोग जांच सुविधाओं, योजनाओं और निगरानी–लिंक्स तक पहुँच सकते हैं।