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मुंबई: मलाड वेस्ट के जनकल्याण नगर में स्थित डोटोम ग्रुप (Dotom Group) की एक परियोजना को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। एक ग्राहक द्वारा निजी कारणों से फ्लैट बुकिंग रद्द करने पर बिल्डर ने 6 लाख रुपये की पूरी राशि लौटाने से इनकार कर दिया है। कंपनी ने इसके पीछे “नो रिफंड पॉलिसी” का हवाला दिया है, जिसे कानूनी विशेषज्ञ “अनुचित व्यापार व्यवहार” (Unfair Trade Practice) मान रहे हैं।
📌 क्या कहता है कानून? (जरूरी नियम जो आपको पता होने चाहिए)
बिल्डर अक्सर ग्राहकों को यह कहकर डराते हैं कि पैसा वापस नहीं मिलेगा, लेकिन RERA और उपभोक्ता कानून ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करते हैं:
- RERA की धारा 18: यदि बिल्डर समय पर पजेशन नहीं देता, तो उसे ब्याज सहित पूरा पैसा लौटाना होगा। यदि ग्राहक खुद बुकिंग रद्द करता है, तो बिल्डर केवल एक ‘उचित राशि’ (आमतौर पर बुकिंग अमाउंट का 10% तक, यदि एग्रीमेंट हो चुका हो) काट सकता है। पूरी राशि जब्त करना अवैध है।
- अनुचित अनुबंध (Unfair Contract): उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार, यदि कोई बिल्डर ऐसे फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाता है जो केवल उसके फायदे के लिए हैं (जैसे ‘नो रिफंड’ क्लॉज), तो कोर्ट उसे ‘एकतरफा और अनुचित’ मानकर रद्द कर सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का रुख: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में कहा है कि बिल्डर खरीदार की मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी गाढ़ी कमाई को ‘जब्त’ (Forfeit) नहीं कर सकता, खासकर तब जब वह फ्लैट किसी और को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा हो।
🛑 सिस्टम पर बड़े सवाल
ग्राहक का आरोप है कि बिल्डर ने न केवल रिफंड देने से मना किया, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि वही फ्लैट अब दूसरे ग्राहक को और भी अधिक कीमत पर बेचा जाएगा।
- क्या MahaRERA ऐसे बिल्डरों पर नकेल कसेगा?
- क्या “नो रिफंड पॉलिसी” के नाम पर लूट का यह खेल बंद होगा?
- सरकार कब तक इन एकतरफा नियमों के खिलाफ सख्त कानून बनाएगी?
संसद वाणी की सलाह: यदि आप भी ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो चुप न बैठें। MahaRERA में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें और उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाएं।