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नई दिल्ली, 12 मार्च 2026: देश में एलपीजी (रसोई गैस) की संभावित कमी और आपूर्ति बाधित होने की खबरों के बीच गुरुवार (12 मार्च 2026) को संसद के बजट सत्र में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने गैस आपूर्ति संकट, बढ़ती मांग और वैश्विक हालात के असर को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई सांसदों ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो देश में गैस सिलेंडर की आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं। संसद परिसर में कुछ सांसदों ने विरोध प्रदर्शन भी किया और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारी पर्याप्त नहीं है और इस पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की जरूरत है।
सरकार का जवाब
इस मुद्दे पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि देश में ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति सुरक्षित है और घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर बढ़ी मांग और पैनिक की वजह से आपूर्ति पर दबाव दिख रहा है, लेकिन सरकार ने वैकल्पिक सप्लाई चैनल सक्रिय कर दिए हैं।
वैश्विक संकट का असर
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में बाधा के कारण एलपीजी और कच्चे तेल के बाजार पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
संसद की कार्यवाही प्रभावित
एलपीजी संकट को लेकर विपक्ष के शोर-शराबे के कारण संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए देशवासियों को भरोसा दिलाया कि गैस आपूर्ति में कोई बड़ी समस्या नहीं आने दी जाएगी।