Connect with us

धर्म

चैत्र नवरात्रि 2026: 6वें दिन मां कात्यायनी की पूजा विधि, विशेष लाभ और महत्व

Published

on

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन, 24 मार्च 2026 को भक्त मां कात्यायनी की विशेष पूजा करते हैं। यह दिन शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है और मान्यता है कि इस दिन मां की आराधना से जीवन में धैर्य, सफलता और शत्रु‑विजय प्राप्त होती है।


मां कात्यायनी का स्वरूप और महत्व

मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा रूप हैं, जो महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर जन्म लेती हैं, इसीलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा। प्रतिमा या चित्रों में इन्हें सिंह पर सवार, चार भुजाओंवाली शक्ति‑स्वरूप देवी के रूप में दर्शाया जाता है – एक भुजा में तलवार या अस्त्र, एक में कमल, और शेष में अभय‑मुद्रा तथा वरद‑मुद्रा के रूप में शांति और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

इनकी आराधना से भक्तों को साहस बढ़ता है, शत्रुओं पर विजय मिलती है और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष – चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की ओर सकारात्मक दिशा प्राप्त होती है।


पूजा विधि: स्टेप‑बाय‑स्टेप

  1. तैयारी:
    • सुबह ब्रह्म‑मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध पानी से छिड़ककर शुद्ध करें और स्वागत‑संकल्प लें।
  2. आसन और श्रृंगार:
    • स्वच्छ लाल या पीले रंग के आसन पर मां की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
    • इसे गुलाबजल / पानी से स्नान कराकर नए वस्त्र चढ़ाएँ, फिर धूप, दीप, रोली, अक्षत, पीले या लाल फूल, फल, शहद और सूखे मेवे अर्पित करें।
  3. मंत्र जाप‑समय:
    • आमतौर पर संध्या‑काल या गोधूलि काल (लगभग सूर्यास्त के समय) या दिन के उच्चतम प्रकाश‑समय में मंत्र‑जाप किया जाता है। आधुनिक समय‑संगति के अनुसार कई भक्त दोपहर के शुभ समय (उदाहरण: 12:00–1:30) या शाम 6:00–7:30 के बीच मंत्र‑जाप करते हैं।
  4. मंत्र‑जाप:
    • “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” या “ॐ कात्यायिनी देव्ये नमः” का जाप 108 या 51 बार करना शुभ

Copyright © 2026 Vashishtha Media House Pvt. Ltd.