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धर्म

लखनऊ: संत रविदास की जयंती पर नई प्रतिमा और सभागार का भव्य उद्घाटन, श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित की

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लखनऊ: आज २ फरवरी २०२६ को संत शिरोमणि सन्त रविदास की जयंती पर राजधानी लखनऊ में एक भव्य आयोजन किया गया, जिसमें उनकी नई निर्मित प्रतिमा और एक आडंबरहित सभागार (ऑडिटोरियम) का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने संत रविदास की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा जताई

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक प्रतिमा और सभागार का उद्घाटन ही नहीं था, बल्कि संत रविदास के महान विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने, याद रखने और नई पीढ़ी में उनके संदेश को स्थापित करने का भी महत्व था।

समारोह में क्या हुआ?

  • कार्यक्रम में स्थानीय समाज, विभिन्न संगठनों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
  • श्रद्धालुओं ने संत रविदास के चित्र और प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
  • नई प्रतिमा और सभागार का उद्घाटन समारोह ने संत की शिक्षाओं और सामाजिक संदेशों को प्रमुखता से उजागर किया।

संत रविदास के संदेश का महत्त्व

संत रविदास १३वीं सदी के महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरू थे, जिनकी शिक्षाएँ समानता, समाज कल्याण, कर्म-साधना और मानवता पर आधारित हैं। उनके उपदेश आज भी समाज में सामाजिक न्याय और सहयोग के मूल्यों को प्रेरणा देते हैं।

उन्हें भारत और विश्व भर में मान्यता मिलती है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उनकी जयंती का उत्सव मनाते हैं, विशेषकर उनके जन्मस्थल सीर गोवर्धन, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में जहां बड़ा धार्मिक उत्सव होता है।

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