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भारत में एलपीजी (LPG / रसोई गैस) संकट लगातार गहराता जा रहा है, जिसके बीच अब सरकारी तेल कंपनियों द्वारा एक नया विकल्प सामने आया है: 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर में केवल 10 किलोग्राम गैस भरने और इसके साथ नए स्टिकर लगाने की चर्चा हो रही है। उद्देश्य साफ है – उपलब्ध एलपीजी स्टॉक को अधिक घरों तक पहुँचाना, ताकि खाड़ी और होर्मुज संकट के चलते बढ़ रही किल्लत और लंबी डिलीवरी की दिक्कतों पर नियंत्रण रह सके।
LPG संकट का कारण – खाड़ी और होर्मुज में दबाव
खाड़ी देशों में चल रहे ईरान‑इजरायल‑अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही पर दबाव बढ़ा है। इसी रास्ते से भारत को काफी हिस्सा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आती है, इसलिए आयात में कमी और जहाज़ों की देरी से देश में रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
इसके अलावा, लंबे समय से देश में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि वैश्विक युद्ध और खाड़ी संकट के कारण आपूर्ति धीमी हो गई है, जिससे संकट और गहरा गया है।
14.2 किलो सिलेंडर में 10 किलो गैस – यह “क्यों” हो रहा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) विचार कर रही हैं कि 14.2 kg घरेलू एलपीजी सिलेंडर में केवल 10 kg गैस भरी जाए। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सीमित एलपीजी स्टॉक से अधिक घरों को गैस मिल सके।
- अगर एक सिलेंडर में 4.2 kg कम गैस भरी जाती है, तो वही उपलब्ध गैस कई घरों तक बँटकर पहुँच सकती है, जिससे स्थिति थोड़ी नरम हो सकती है।
- यह कदम संकट की अस्थायी स्थिति में लिया जा रहा है, ताकि घरेलू रसोई गैस की सप्लाई बनी रहे, चाहे खाड़ी और होर्मुज के कारण आयात में दिक्कत हो।
क्या यह फैसला आधिकारिक रूप से लागू हो गया है?
हालांकि इस विचार की चर्चा ज़ोरों पर है, लेकिन भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अभी तक 14.2 kg सिलेंडर को 10 kg गैस में बदलने का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। ministry ने इस बात को “highly speculative” और “अफवाह/संभावित विकल्प” के रूप में बताया है, न कि पक्की नीति।
यानी:
- यह अभी सिर्फ एक विचार / परिकल्पना है,
- अगर भविष्य में स्थिति और विकसित होती है तो कंपनियां इसे आगे ला सकती हैं, लेकिन अभी यह लागू नहीं है।
नया स्टिकर क्यों लगाया जाएगा?
अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो 14.2 kg लेबल वाले सिलेंडर पर नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिसमें यह साफ‑साफ लिखा होगा कि
“सिलेंडर में केवल 10 kg गैस भरी गई है”।
- इससे उपभोक्ताओं को गैस की मात्रा के बारे में पूरी पारदर्शिता मिलेगी।
- साथ ही, कीमत 10 kg गैस के हिसाब से घटाई जाएगी, ताकि उपभोक्ता को नुकसान न हो और उन्हें “निष्पक्ष” दर पर लाभ लगे।
सरकार की तरफ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार ने एलपीजी संकट को लेकर कई कदम लिए हैं:
- घरेलू उपयोग को प्राथमिकता: रिफाइनरीज़ से अतिरिक्त एलपीजी घरेलू खपत के लिए निर्देश दिए गए हैं।
- बुकिंग‑गैप और दूसरे नियम: गैस सिलेंडर की बुकिंग पर नियंत्रण के लिए अंतर‑बुकिंग गैप और नियम लागू किए गए हैं ताकि कालाबाज़ारी और होर्डिंग रोकी जा सके।
इस बीच, तेल कंपनियां विकल्पों पर विचार कर रही हैं, लेकिन सरकार ने यह भी कहा है कि खपत और दबाव को लेकर चिंता ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा पैनिक नहीं।