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पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का लोकसभा में मजबूत बयान: होर्मुज स्ट्रेट बंद करना अस्वीकार्य, 41 देशों से तेल-गैस आयात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 41 देशों से तेल-गैस आयात की जानकारी साझा की, जो वैश्विक तनाव के बीच देश की तैयारियों को रेखांकित करता है।

संकट की पृष्ठभूमि

पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है, जो दुनिया के 25% तेल और गैस व्यापार का प्रमुख मार्ग है। पीएम मोदी ने सदन में कहा कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक चला है और नागरिकों व पावर प्लांट्स पर हमले निंदनीय हैं। भारत ने प्रभावित देशों के नेताओं से बातचीत की और 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित कर भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया, जिसमें ईरान से 1,000 से अधिक नागरिक शामिल हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर भारत का सख्त रुख

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी रुकावट को स्वीकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे भारत को कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है। ईरान की IRGC ने स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया था, जिससे ब्रेंट क्रूड 78.72 डॉलर प्रति बैरल तक उछला। इसके बावजूद, भारत ने पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सुनिश्चित रखी।

ऊर्जा सुरक्षा में विविधता: 41 देशों से आयात

पहले 27 देशों से सीमित आयात करने वाला भारत अब 41 देशों से तेल-गैस मंगा रहा है, जिसमें रूस (35-40% हिस्सा), इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका और अफ्रीका-लैटिन अमेरिका के देश शामिल हैं। देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं, जो किसी एक क्षेत्रीय संकट से प्रभावित होने पर सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह रणनीति वैश्विक ऊर्जा संकट में भारत को मजबूत बनाती है।

प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताहिस्सेदारी/विशेषता
रूस35-40%, सबसे बड़ा सप्लायर 
इराक, सऊदी अरबप्रमुख मिडिल ईस्ट स्रोत 
यूएई, अमेरिकाविविधीकरण के लिए महत्वपूर्ण 
अन्य (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका)स्पॉट कार्गो से जोखिम कम 

भारत की शांति अपील और आगे की राह

पीएम मोदी ने शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देते हुए कहा कि संसद से एकजुट आवाज विश्व को भेजनी चाहिए। भारत ने प्रभावित भारतीयों को हर संभव मदद दी और व्यापारिक संबंधों को बनाए रखा। यह बयान न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक भूमिका को भी उजागर करता है।

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