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नई दिल्ली, 13 मार्च 2026:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने आश्वासन दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) दिया जाएगा, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी।
ईरान के राजदूत का बयान
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि भारत ईरान का मित्र देश है और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत से जुड़े जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
- वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति का लगभग 20–30% इसी रास्ते से होता है।
- भारत भी अपने तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है।
भारत की कूटनीतिक कोशिशें
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए थे। भारत सरकार ने स्थिति को देखते हुए ईरान से लगातार संपर्क बनाए रखा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच बातचीत के बाद भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर
यह आश्वासन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि:
- भारत की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाधा से तेल की कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत के लिए कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है और इससे ऊर्जा आपूर्ति की चिंता कुछ हद तक कम हो सकती है।