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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की, जिसमें पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात पर चर्चा हुई। उन्होंने बढ़ते संघर्ष, नागरिक हानि और बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करते हुए शांति के लिए कूटनीति का आह्वान किया।
बातचीत का मुख्य उद्देश्य
पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाधता पर जोर दिया। राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ यह पहली बड़ी बातचीत 11 मार्च 2026 को हुई, जब ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष चरम पर था। उन्होंने हिंसा को समाधान न बताते हुए संवाद की अपील की, जो भारत की शांति-प्रिय नीति को दर्शाता है।
क्षेत्रीय संकट का पृष्ठभूमि
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 से युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहरा गया। हजारों मौतें और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिस पर पीएम ने गहरी चिंता जताई। ईद-नौरोज के मौके पर 20-21 मार्च को हुई हालिया कॉल में भी शांति की कामना व्यक्त की गई।
भारत की प्राथमिकताएं
भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में भारतीयों की भलाई और व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रखना शीर्ष प्राथमिकता है। पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे पर हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की रक्षा पर बल दिया। दोनों नेता आगे संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए।
कूटनीति की दिशा में कदम
यह बातचीत भारत की सक्रिय कूटनीति का उदाहरण है, जो संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखती है। पीएम मोदी का संदेश साफ है- हिंसा नहीं, बातचीत से ही समाधान। यह वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत भूमिका को रेखांकित करता है।