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मुम्बई

एक्सपोज़े: मालवणी में ‘मौत का बोर्ड’ और म्हाडा की ‘अंधेरी नगरी’!

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क्या किसी मासूम की बलि का इंतज़ार कर रहे हैं अधिकारी रोहित शिंदे?

मुंबई | विशेष जांच रिपोर्ट (संसद वाणी)

मालवणी, गेट नंबर 8 (सामना नगर): यहाँ नियम नहीं, बल्कि रसूखदारों की ‘ज़िद’ चलती है। म्हाडा (गोरेगांव) के अधिकारियों की नाक के नीचे बालासाहेब भगत नामक व्यक्ति ने फेडरेशन के नाम पर डर का साम्राज्य खड़ा कर दिया है। मामला है—लोहे का वह भारी-भरकम बोर्ड, जो कभी भी गिरकर यहाँ के मासूम बच्चों और परिवारों की जान ले सकता है।


⚠️ हादसा हो चुका, फिर भी ‘खूनी बोर्ड’ से प्यार?

आपको बता दें कि यह कोई मामूली बोर्ड नहीं है; इसे खड़ा करने में 15 लोगों की फौज लगती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह बोर्ड एक बार गिर चुका है, लेकिन फेडरेशन के अध्यक्ष ने अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए उसे फिर वहीं ठोक दिया।

सवाल सीधा है: क्या रोहित शिंदे को यह नहीं दिखता कि जिस बोर्ड के नीचे रोज़ाना स्कूल के बच्चे और सैकड़ों परिवार खड़े होते हैं, वह उनकी कब्र बन सकता है?



प्रचार की भूख या जान से खिलवाड़?

फेडरेशन के बोर्ड पर ‘सामना मित्र मंडल’ और अध्यक्ष-सचिव के नामों की बड़ी-बड़ी तख्तियां क्या सुरक्षा से ऊपर हैं?

  • तर्क: अगर नाम ही लिखना था, तो गेट के पिलर या दीवार पर लिखा जा सकता था।
  • हकीकत: जानबूझकर भारी लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा किया गया ताकि दबदबा दिखे।
  • जवाब: पूछने पर अध्यक्ष और सचिव का एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है— “यह लीगल है!” संसद वाणी पूछता है— जनता की जान जोखिम में डालना किस कानून की किताब में ‘लीगल’ लिखा है?

🚨 रोहित शिंदे: कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ‘कोरा आश्वासन’

म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे को इस पूरे मामले की ए-टू-जेड जानकारी है। उन्होंने खुद माना कि यह गलत है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा ‘शून्य’ है।

ऐसा लगता है जैसे रोहित शिंदे ने ठान लिया है कि मालवणी की खबरें चाहे कितनी भी छपें, वे ‘कुंभकरण’ की ऐसी नींद सोएंगे जिसे कोई नहीं जगा सकता। क्या प्रशासन किसी बड़ी रैली के दौरान इस बोर्ड के गिरने और लाशें बिछने का इंतज़ार कर रहा है?


🔥 प्रशासन से ‘वशिष्ठ वाणी’ के तीखे सवाल:

  1. रोहित शिंदे जवाब दें— सब कुछ जानने के बाद भी आप फाइल दबाकर क्यों बैठे हैं?
  2. अनुमति का सच: क्या इस भारी लोहे के स्ट्रक्चर के लिए म्हाडा या बीएमसी से कोई ‘स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट’ लिया गया है?
  3. ज़िम्मेदारी: अगर कल कोई बच्चा इस बोर्ड के नीचे दब जाता है, तो क्या रोहित शिंदे और बालासाहेब भगत पर हत्या का केस दर्ज होगा?

जनता की हुंकार!

सामना नगर के निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अगर यह ‘मौत का ढांचा’ तुरंत नहीं हटाया गया, तो म्हाडा कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

संसद वाणी की चेतावनी: जब तक रोहित शिंदे अपनी नींद से नहीं जागते और यह अवैध बोर्ड नहीं हटता, हमारी कलम रुकने वाली नहीं है।

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