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दिल्ली

इंडिगो की ‘उड़ान’ में लूट की ऊंचाई: सरकार की चुप्पी और मीडिया का TRP ड्रामा!

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नई दिल्ली/वशिष्ठ वाणी। आहा! क्या जमाना आ गया है, जहां हवाई जहाज उड़ने की बजाय जनता की जेब उड़ाने में माहिर हो गए हैं। इंडिगो एयरलाइंस, जो कभी ‘लो-कॉस्ट’ का तमगा लगाकर घूमती थी, अब ‘हाई-लूट’ का पर्याय बन चुकी है। फ्लाइट पर फ्लाइट कैंसिल हो रही हैं, और बाकी जो उड़ रही हैं, वे टिकट के दाम ऐसे बढ़ा रही हैं जैसे आसमान में बादल नहीं, बल्कि सोने की बारिश हो रही हो। और हमारी ‘मजबूत’ सरकार? वो तो बस तमाशबीन बनी बैठी है, पॉपकॉर्न खाते हुए ये नजारा देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने तो कहा था, “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा,” लेकिन लगता है ये नारा सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित था। यहां तो खुले आम लूट मची है, और सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई? जी नहीं, वो तो बस ‘वेट एंड वॉच’ मोड में है, जैसे कोई क्रिकेट मैच देख रही हो जहां इंडिगो बैटिंग कर रही है और जनता बॉलिंग!

याद कीजिए, पहले भी हमारे मीडिया ने फ्लाइट से जुड़े मुद्दों पर खूब आवाज उठाई थी। लेकिन उस वक्त? किसी अन्य मीडिया के मुंह से एक शब्द नहीं निकला! शायद तब TRP नहीं मिल रही थी। अब, इंडिगो का मुद्दा बड़ा हो गया तो सभी चैनल एकदम से जाग गए। “इंडिगो की मनमानी!” “सरकार की लापरवाही!” चीख-चीख कर कोसना शुरू। लेकिन गौर करने लायक बात ये है कि इन ‘बहादुर’ मीडिया वालों की हिम्मत इतनी नहीं कि वो केंद्र में बैठे मंत्री या खुद पीएम मोदी से एक सवाल पूछ लें। क्यों? क्योंकि वो जानते हैं, सवाल पूछा तो अगले दिन उनका चैनल ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा बन जाएगा। या फिर, वो खुद को ‘गोदी मीडिया’ कहलवाने से बचाना चाहते हैं, लेकिन सच तो ये है कि वो गोदी में ही लेटे हुए हैं, सत्ता की लोरी सुनते हुए।

अब जरा इंडिगो की ‘महान’ रणनीति पर नजर डालिए। फ्लाइट कैंसिल कर दो, वजह? मौसम, तकनीकी खराबी, या बस ‘मन कर रहा है’। फिर बाकी फ्लाइटों के दाम दोगुने-तिगुने कर दो। जनता? वो तो लूटने के लिए ही बनी है न! कुंभ मेले में भी यही हुआ था – फ्लाइट कंपनियां मनचाहे दाम बढ़ाती रहीं, और सरकार पूरा सहयोग देती रही। जैसे कह रही हो, “चलो, भक्तों को उड़ान दो, लेकिन जेब से पहले उड़ान लो!” एक तरह से देखा जाए तो ये सिस्टम ही जनता को लूटने का बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। पीएम मोदी ने बड़े जोश में कहा था, “हर चप्पल पहनने वाला हवाई जहाज में सफर कर सकेगा।” वाह! क्या सपना था। लेकिन आज? टिकट के दाम ऐसे कि चप्पल वाला तो क्या, जूते वाला भी सोचेगा कि ट्रेन से ही चला जाऊं। ये भी एक जुमला साबित हुआ, जैसे वो मशहूर “15 लाख रुपये हर खाते में” वाला। 2014 में सत्ता पाने के लिए “सबका साथ, सबका विकास” का नारा लगाया, लेकिन अब? विकास तो दूर, साथ भी सिर्फ चुनिंदा लोगों का। बाकी जनता को बस हिंदू-मुस्लिम का ‘गेम’ खेलकर बेवकूफ बनाया जा रहा है।और ये मीडिया? वो तो मास्टर हैं ध्यान भटकाने में।

आज इंडिगो का मुद्दा गर्म है, लेकिन कल? वो हिंदू-मुस्लिम का राग अलापना शुरू कर देंगे। “राहुल गांधी ने क्यों नहीं रोका?” या “ये नेहरू की गलती है!” या फिर “इंदिरा गांधी के जमाने से ही फ्लाइट महंगी हैं!” सारा इल्जाम विपक्ष पर डाल देंगे। सत्ता के गुलाम बनकर, TRP की खातिर, जनता का ध्यान हटाने में लग जाएंगे।

पीएम मोदी की करनी और कथनी में फर्क? वो तो साफ दिख रहा है। कहा था ना खाऊंगा ना खाने दूंगा, लेकिन यहां लूट मची है और कोई रोकने वाला नहीं। कुछ दिनों में मुद्दा भटक जाएगा – कोई नया विवाद, कोई नई बहस, और इंडिगो का मामला ठंडे बस्ते में।

लेकिन सवाल ये है, जनता कब जागेगी?

जब तक जनता नहीं जागती, सत्ताधारी ऐसे ही मनमानी करते रहेंगे। दबाव बनाइए! सोशल मीडिया पर, सड़कों पर, जहां भी हो – कहिए कि फ्लाइट के रेट मनचाहे तरीके से नहीं बढ़ाए जाएंगे। ये लूट बंद होनी चाहिए।

सरकार को शर्म आनी चाहिए, जो जनता को बेवकूफ बनाने में लगी है। अंध भक्तों को भी सोचना चाहिए – क्या यही है ‘विकसित भारत’? जहां उड़ान का सपना जुमला बन गया, और लूट का खेल चल रहा है।

अंत में, एक व्यंग्य: अगर पीएम मोदी का नारा सच होता, तो आज चप्पल वाले फ्लाइट में उड़ रहे होते, न कि जेब उड़ाकर जमीन पर रेंग रहे होते। लेकिन लगता है, ये सब ‘अच्छे दिन’ का हिस्सा है – जहां अच्छे दिन सिर्फ एयरलाइंस वालों के हैं, जनता के नहीं। जागो जनता, वरना ये उड़ान जारी रहेगी… आपकी जेब की!

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