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विशेष एक्सक्लूसिव: 121 दिन की खबरें! कांदिवली ट्रैफिक विभाग, चारकोप पुलिस और BMC की ‘शर्मनाक लाचारी’ का पर्दाफाश; भारत गैस एजेंसी के ‘सिलेंडर बम’ पर टिका भूमिपार्क रोड!

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मुंबई (कांदिवली वेस्ट): कानून, व्यवस्था, जनसुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी—कांदिवली वेस्ट के भूमि पार्क रोड स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर ये तमाम शब्द महज़ एक भद्दा मज़ाक बनकर रह गए हैं। पिछले चार महीनों से ‘संसद वाणी’ लगातार चीख-चीख कर आगाह कर रही है कि भारत गैस एजेंसी ने सार्वजनिक सड़क को 24 घंटे चलने वाला ‘अवैध सिलेंडर गोदाम’ बना दिया है। लेकिन कांदिवली ट्रैफिक विभाग, चारकोप पुलिस स्टेशन और बीएमसी (BMC) के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।

आरटीआई रद्दी का टुकड़ा और खबरें अधिकारियों के लिए सिर्फ कागजी पन्ने? इस जानलेवा खतरे के खिलाफ जनता ने आरटीआई भी दाखिल की, दर्जनों खबरें भी पब्लिश हुईं, लेकिन कांदिवली का पूरा प्रशासनिक तंत्र ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागने को तैयार नहीं है। आरटीआई के जवाबों को गोल-मटोल घुमाना और मीडिया की रिपोर्टों पर आंखें मूंद लेना यह साबित करता है कि या तो अधिकारियों ने भारत गैस एजेंसी के आगे अपने घुटने टेक दिए हैं, या फिर इस खतरनाक खेल में ‘मलाई का बहुत बड़ा हिस्सा’ ऊपर से नीचे तक बंट रहा है।

अधिकारियों की इस ‘रहस्यमयी चुप्पी’ के पीछे का कड़वा सच:

  • कांदिवली ट्रैफिक पुलिस: 20-25 सिलेंडरों से लदी भारी गाड़ियों को 24 घंटे सड़क पर खड़ा देखकर भी आपकी क्रेन क्यों पंगु हो जाती है? क्या नो-पार्किंग के चालान केवल आम नागरिकों की जेब काटने के लिए हैं?
  • चारकोप पुलिस स्टेशन: रिहायशी इमारत के ठीक नीचे दर्जनों एलपीजी सिलेंडरों का अवैध जमावड़ा एक ‘चलती-फिरती तबाही’ (Explosive Hazard) है। क्या पुलिस किसी बड़ी आगजनी और लाशों के ढेर का इंतजार कर रही है ताकि जांच का नाटक शुरू किया जा सके?
  • बीएमसी प्रशासन: जो बीएमसी रेहड़ी-पटरी वालों का सामान उठाने में सेकंड नहीं लगाती, वह भारत गैस एजेंसी के सामने इतनी लाचार और नतमस्तक क्यों दिखती है?

संसद वाणी की सीधी चेतावनी: यदि भूमि पार्क रोड पर जरा सी भी चूक से कोई हादसा होता है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी कांदिवली ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, चारकोप पुलिस स्टेशन के प्रभारी और बीएमसी वार्ड अधिकारी की होगी। उन पर आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

अब सवाल पूछने का वक्त नहीं, सीधे ‘एक्शन या सस्पेंशन’ का वक्त है। अगर गोरेगांव और कांदिवली का ट्रैफिक विभाग काम करने में असमर्थ है, तो वरिष्ठ पुलिस आयुक्त (CP Mumbai) तुरंत इन अधिकारियों का तबादला करें या इन्हें सस्पेंड कर जांच बैठाएं!

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