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मुंबई (संसद वाणी): मलाड वेस्ट के चिंचोली बंदर रोड स्थित ‘फ़्लैग रेस्टोरेंट’ (Flag Restaurant) के बाहर सार्वजनिक सड़क को अवैध पार्किंग लॉट में तब्दील करने का एक अनोखा और संगठित खेल सामने आया है। यहां सिर्फ नियम नहीं तोड़े जा रहे, बल्कि गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के कुछ तत्वों के साथ मिलकर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।
अधिकारी के आने से पहले रेस्टोरेंट को ‘अलर्ट’, फिर कैमरा रिकॉर्डिंग का ड्रामा
स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब भी चिंचोली बंदर रोड पर फ़्लैग रेस्टोरेंट के बाहर हो रही अवैध पार्किंग की शिकायत की जाती है, तो कार्रवाई के नाम पर केवल एक सोची-समझी ‘सेटिंग’ को अंजाम दिया जाता है:
- अग्रिम सूचना (Informal Alert): शिकायत दर्ज होते ही विभाग के अंदर से कोई गुप्त रूप से फ़्लैग रेस्टोरेंट के स्टाफ को सतर्क कर देता है।
- सड़क तुरंत खाली: ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी पहुंचने से ठीक पहले रेस्टोरेंट वाले सड़क पर खड़ी गाड़ियों को हटा लेते हैं।
- सुविधाजनक वीडियो साक्ष्य: मौका-ए-वारदात पर पहुंचकर ट्रैफिक अधिकारी खाली सड़क की कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेज देते हैं कि “जांच में कोई अवैध पार्किंग नहीं पाई गई।”
- फिर वही खेल जारी: जैसे ही आरटीओ/ट्रैफिक अधिकारी अपनी गाड़ी मोड़कर वहां से निकलते हैं, रेस्टोरेंट का स्टाफ दोबारा गाड़ियों को सड़क पर लाइन से खड़ा करवा देता है।
दूसरी बार शिकायत की तो भूल जाइए कार्रवाई
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यदि कोई नागरिक इस ड्रामा के तुरंत बाद दोबारा शिकायत दर्ज कराता है, तो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दोबारा किसी टीम को भेजा ही नहीं जाता। पहली फर्जी रिपोर्ट को ही आधार बनाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।
जनता का सीधा सवाल: आप कार्रवाई के लिए बैठे हैं या मिलीभगत के लिए?
यह पूरा घटनाक्रम यह स्पष्ट करता है कि यह केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा चलाया जा रहा एक सुनियोजित ‘प्रोटेक्टिव सिंडिकेट’ है। जनता अब सवाल पूछ रही है:
- क्या गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का काम अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करना है या फिर आरोपी रेस्टोरेंट संचालकों को मुखबिरी देकर बचाना?
- नो-पार्किंग जोन में लगातार लग रहे इस जाम के लिए क्या विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?
जनता को अब खुद जागना होगा और इस व्यवस्था से सीधे सवाल पूछने होंगे। जब तक इस ‘फिक्सिंग खेल’ में शामिल गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के जिम्मेदार कर्मियों पर कड़ा संज्ञान लेकर निलंबन और विभागीय जांच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक मलाड वेस्ट की सड़कों को इस फर्जीवाड़े से मुक्ति नहीं मिलने वाली।