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⚖️ क्या अब फेडरेशन और सोसाइटी चेयरमैन के अन्य कारनामों पर भी चलेगा म्हाडा का चाबुक? अभिषेक वशिष्ठ की जीत ने खोली बदलाव की राह
मुंबई (विशेष संवाददाता): मालवाणी के समाना नगर और आसपास के परिसरों में उस वक्त हलचल मच गई जब म्हाडा (MHADA) के उप-निबंधक बी. एस. कटरे ने मालवाणी स्वप्नपूर्ति कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी द्वारा दायर रिकवरी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। उप-निबंधक के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद समाना नगर मालवाणी के स्थानीय निवासियों और अन्य सदस्यों में एक नई उम्मीद जाग उठी है कि अब सोसाइटी और फेडरेशन के अध्यक्ष की अन्य मनमानियों पर भी म्हाडा का कड़ा चाबुक चलेगा।
🚨 खून्नस में बनाया था फर्जी मेंटेनेंस का दबाव
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब वशिष्ठ मीडिया हाउस के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी व प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने म्हाडा के आपातकालीन (एमरजेंसी) रास्ते पर अवैध पार्किंग और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ आवाज उठाई थी। अभिषेक वशिष्ठ की शिकायत पर म्हाडा प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोसाइटी परिसर में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया था और ₹1,08,000 की भारी पेनल्टी ठोकी थी।
इसी कार्रवाई की खून्नस (बदले की भावना) में आकर फेडरेशन और सोसाइटी चेयरमैन बालासाहेब भगत ने अभिषेक वशिष्ठ पर फर्जी मेंटेनेंस, बैक-डेटेड पेनल्टी और बिना गाड़ी पार्क किए कार पार्किंग शुल्क का दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि, कानूनी दांव-पेच और म्हाडा की सुनवाई के दौरान उप-निबंधक बी.एस. कटरे ने निष्पक्षता दिखाते हुए सोसाइटी की रिकवरी एप्लीकेशन को पूरी तरह खारिज (रद्द) कर दिया।
🏛️ महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1960 के तहत फैसला
उप-निबंधक (कोऑपरेटिव सोसाइटीज़, मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स, म्हाडा) बी. एस. कटरे ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:
“महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1960 के सेक्शन 154(2) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मालवाणी स्वप्नपूर्ति कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी द्वारा रेस्पोंडेंट श्रीमती स्मिता अभिषेक वशिष्ठ और श्री अभिषेक अनिल वशिष्ठ के खिलाफ दायर रिकवरी याचिका को खारिज किया जाता है।”
💬 समाना नगर में क्यों जागी बड़ी उम्मीद?
पिछले 15 वर्षों से पद पर काबिज चेयरमैन के खिलाफ आए इस फैसले के बाद समाना नगर और मालवाणी क्षेत्र के आम नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। लोगों का मानना है कि अभिषेक वशिष्ठ की इस साहसिक कानूनी लड़ाई ने रास्ता साफ कर दिया है। अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि फेडरेशन द्वारा जनता के सुरक्षा मार्गों के अतिक्रमण और फंड के दुरुपयोग जैसे अन्य विषयों पर भी प्रशासन जल्द ही कड़ा संज्ञान लेगा।
वहीं, इस जीत के बाद अभिषेक वशिष्ठ की लीगल टीम अब चेयरमैन बालासाहेब भगत को लीगल नोटिस भेजने की तैयारी में है, ताकि व्यक्तिगत ज़िद में बर्बाद हुई वकील की फीस (₹60,000 – ₹70,000) का हर्जाना चेयरमैन की निजी जेब से वसूला जा सके।