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भारतीय पुरुष हॉकी टीम के स्टार फॉरवर्ड गुरजंत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा कर दी है। 31 साल के गुरजंत ने टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहते हुए भारत को दो बार ओलंपिक मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
संन्यास की घोषणा कहां और कैसे हुई
गुरजंत सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया के वार्षिक पुरस्कार समारोह में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को विदा बोला। उन्होंने कहा कि जिन खिलाड़ियों को एड़ी‑चोटी का जोर लगाकर देखकर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया, उनके साथ ही भारत के लिए खेलने का सपना पूरा होना उनके लिए एक अमिट याद है।
गुरजंत का अंतरराष्ट्रीय करियर
गुरजंत ने 2017 में भारतीय टीम के लिए अपना सीनियर डेब्यू किया और अब तक 130 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 33 गोल दागे हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत को 41 साल बाद हॉकी में पदक दिलाने वाली टीम का हिस्सा रहते हुए कांस्य पदक जीता और पेरिस ओलंपिक 2024 में भी इस प्रदर्शन को बनाए रखा।
रिकॉर्ड और खास उपलब्धियां
गुरजंत सिंह के नाम भारत के लिए सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोल दागने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने जनवरी 2020 में एफआईएच प्रो लीग में नीदरलैंड्स के खिलाफ सिर्फ 13 सेकंड में गोल दागकर यह मानद उपलब्धि हासिल की थी। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स स्वर्ण, एशिया कप और एशियाई चैंपियन्स ट्रॉफी जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में भारत को टॉप पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संन्यास के पीछे की कहानी और भविष्य
गुरजंत ने बताया कि पिछले साल पीठ की चोट के कारण वे लगभग 7‑8 महीने तक सीनियर टीम से दूर रहे, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय टीम से अपनी जगह गंवा देने के बाद अब यह समय ठीक माना कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी से कदम पीछे खींच लिया जाए। वह घरेलू हॉकी, हॉकी इंडिया लीग और क्लब हॉकी में खेलते रहने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन कोचिंग को लेकर अभी सोच नहीं रहे हैं।