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ट्रंप प्रशासन के ईरान पर संभावित हमले के संकेतों ने पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। भारत ने तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए विशेष तैयारी शुरू कर दी है।
ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान की चुनौती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए हमले की धमकी दी है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी जारी की, जिसमें इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई। इससे मध्य पूर्व में THAAD और पैट्रियट सिस्टम तैनात हो गए हैं।
भारत पर तेल संकट का सीधा असर
भारत अपनी 53% से अधिक कच्चे तेल की जरूरत मध्य पूर्व से पूरी करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से ब्रेंट क्रूड कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो पेट्रोल-डीजल महंगे होने का कारण बनेगी। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर ट्रंप की 25% टैरिफ पॉलिसी से खतरा मंडरा रहा है।
सरकार की रणनीतिक तैयारियां
पीएम मोदी की अगुवाई में CCS बैठक बुलाई गई, जिसमें विदेश नीति, सुरक्षा और मध्य एशिया पहुंच पर चर्चा होगी। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 9-15 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है, जबकि चाबहार की क्षमता 5 लाख TEU तक बढ़ाई जा रही है। भारत हालात पर पैनी नजर रखे हुए है।
आर्थिक चुनौतियां और वैश्विक प्रभाव
तेल उत्पादकों के भंडार सीमित होने से LNG सप्लाई भी प्रभावित हो रही है, जो भारत जैसे आयातक देशों के लिए संकट है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे संघर्ष से तेल कीमतें 130-200 डॉलर तक जा सकती हैं। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।