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स्पेशल ब्यूरो, मुंबई (संसद वाणी) — देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) स्थित ‘छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स’ के बाहर की मुख्य सड़क इन दिनों किसी वैध पार्किंग या यातायात का रास्ता नहीं, बल्कि एलपीजी गैस सिलेंडरों (LPG Gas Cylinders) का खुला और अनधिकृत गोदाम बन चुकी है।
संसद वाणी (Sansad Vani) की विशेष पड़ताल में यह खौफनाक सच सामने आया है कि भारत गैस (Bharat Gas) की एजेंसियों के दर्जनों एलपीजी सिलेंडरों से भरे हुए कमर्शियल ट्रक और पिकअप वाहन दिन-रात सड़क के दोनों किनारों पर लाइन से पार्क रहते हैं। रोजाना मिल रही दर्जनों जन-शिकायतों और संसद वाणी द्वारा उठाए गए सवालों के बावजूद कांदिवली ट्रैफिक विभाग, मुंबई RTO, BMC (R-South Ward) और स्थानीय चारकोप पुलिस स्टेशन का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील और रहस्यमयी बना हुआ है।
कानून क्या कहता है? (Safety Norms & Explosives Act Violation)
क्या भारत गैस एजेंसी के पास अपना गोदाम (Godown) नहीं है, तो वे सार्वजनिक सड़क को ही अपना गोदाम बना लेंगे? आइए जानते हैं देश का कानून इस पर क्या कहता है:
1. एक्सप्लोसिव्स एक्ट 1884 और एलपीजी रूल्स (Gas Cylinder Rules, 2016)
- सख्त नियम: पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, ज्वलनशील एलपीजी सिलेंडरों (LPG Cylinders) से भरे वाहनों को किसी भी रिहायशी इलाके या सार्वजनिक सड़क पर बिना सुरक्षा व्यवस्था के खड़े रखना गैर-कानूनी और गंभीर संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है।
- गोदाम की अनिवार्यता: किसी भी गैस एजेंसी (Distributorship) को लाइसेंस इसी शर्त पर मिलता है कि उनके पास आबादी से दूर सरकार द्वारा प्रमाणित लाइसेंस प्राप्त गोदाम (Authorized Warehouse) हो।
2. मोटर वाहन अधिनियम और जन-सुरक्षा (Public Safety)
- रिहायशी इमारतों (जैसे छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स) के ठीक बाहर ज्वलनशील पदार्थों से भरे ट्रक खड़े करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सार्वजनिक उपद्रव (Public Nuisance) और लापरवाही से इंसानी जिंदगी को खतरे में डालने (Endangering Life & Safety) की गंभीर धारा में आता है।
एक छोटी सी चिंगारी… और तबाह हो जाएंगे सैकड़ों परिवार!
संसद वाणी सीधे तौर पर कांदिवली ट्रैफिक विभाग, BMC और RTO अधिकारियों से यह तीखा और चुभने वाला सवाल पूछता है:
“अगर किसी दिन गलती से या किसी की लापरवाही से इस सड़क पर एक छोटी सी चिंगारी भड़क गई, तो छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स और आसपास की इमारतों में रहने वाले सैकड़ों मासूम परिवारों का क्या होगा? क्या प्रशासन को किसी बड़े ‘हादसे’ और लाशों के ढेर का इंतजार है, उसके बाद ही फाइलें हिलेंगी?”
‘आशीर्वाद’ या प्रशासनिक पंगुता?
अगर कांदिवली ट्रैफिक विभाग और चारकोप पुलिस चाहती, तो क्रेन बुलाकर और धारा 283 BNS के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करके इन गाड़ियों को 1 घंटे में हटवा सकती थी। लेकिन भारत गैस एजेंसी के मालिक का बेखौफ अंदाज और अधिकारियों की चुप्पी यह इशारा करती है कि या तो कानून का डर खत्म हो चुका है, या फिर इस खतरनाक खेल पर ‘विशेष आशीर्वाद’ बना हुआ है।
संसद वाणी का अल्टीमेटम
यदि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर कांदिवली ट्रैफिक पुलिस, BMC और RTO संयुक्त रूप से अभियान चलाकर:
- छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स रोड से सिलेंडरों से भरे सभी वाहनों को स्थायी रूप से नहीं हटवाती,
- संबंधित भारत गैस एजेंसी और गाड़ी मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं करती,
तो संसद वाणी इस पूरे मामले और वीडियो साक्ष्यों को मुख्य विस्फोटक नियंत्रक (PESO / CCOE), महाराष्ट्र गृह विभाग (Home Dept.), परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner) और माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष औपचारिक जनहित शिकायत के रूप में पेश करेगा।