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📰 संसद वाणी (विशेष रिपोर्ट) | 02 अगस्त 2026
मुंबई: देश की जनता जब पुलिस और प्रशासन की हीलाहवाली से थक हार जाती है, तो उसके पास खुद को सशक्त महसूस करने का एक ही कानूनी जरिया बचता है—सूचना का अधिकार (RTI)। आम नागरिक यह मानकर चलता है कि RTI की एक अर्जी बड़े से बड़े भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय कर देगी। लेकिन जब ‘खाकी’ ही RTI के कानून को अपने जूते की नोक पर रखने लगे, तो सोचिए जनता न्याय मांगने कहाँ जाएगी?
मुंबई के मालवणी पुलिस स्टेशन से सामने आया ताजा मामला इस बात का जीता-जागता सबूत है कि पुलिस प्रशासन किस कदर बेखौफ और निरंकुश हो चुका है।
🏛️ जब पुलिस का रवैया कहे: “तुम कुछ भी कर लो, हम वही करेंगे जो हमारा मन कहेगा!”
मामला मालवणी (सामना नगर, गेट नंबर 08) में 5 सोसायटियों को मिलाकर बनाई गई ‘डॉ. अब्दुल कलाम फेडरेशन’ के पदाधिकारियों द्वारा दीवार बनाने के चक्कर में हरे-भरे पेड़ों की जड़ें बेरहमी से काटने का है।
जनता त्रस्त, पुलिस मस्त: पेड़ों की इस अवैध कटाई पर पर्यावरण प्रेमियों की सामाजिक संस्था ने आवाज उठाई, बीएमसी (BMC) ने जांच की और अपराध को 100% सच पाया। बीएमसी के उद्यान विभाग ने 11 जनवरी 2025 को ही मालवणी पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा।
3 महीने की रहस्यमयी चुप्पी: बीएमसी की रिपोर्ट पर महज एक NC (No. 1907/2025) दर्ज करने में तत्कालीन जांच अधिकारी पीएसआई अमृता देशमुख को 3 पूरे महीने लग गए।
18 महीने बाद भी FIR गायब: आज अगस्त 2026 आ चुका है, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी दोषियों पर न FIR हुई, न कोर्ट से जांच की अनुमति मांगी गई।
पुलिस का यह रवैया साफ दिखाता है कि वे जनता को सीधा संदेश दे रहे हैं: “तुम RTI डालो, बीएमसी से शिकायत करो या किसी भी हद तक चले जाओ, हम जवाब अपने मनमुताबिक ही देंगे और कार्रवाई वही करेंगे जो हमारी मर्जी होगी!”
👁️🗨️ ACP की रबर स्टैंप वाली भूमिका: बिना पढ़े, बिना सोचे भेज दिया जवाब!
जब RTI के जरिए मालवणी पुलिस से सीधे तीखे सवाल पूछे गए कि 3 महीने फाइल क्यों दबाई रखी गई? क्या पुलिस ने इस NC पर FIR के लिए कोर्ट में अर्जी दी? — तब जो जवाब आया, उसने पूरे RTI कानून का ही मज़ाक उड़ाकर रख दिया।
सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) कार्यालय से लिख दिया गया कि “NC दर्ज है, आवेदक कोर्ट जाकर राहत ले।”
यहाँ ACP के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठते हैं:
क्या ACP साहब सिर्फ नीचे से आई रिपोर्ट पर आँख बंद करके दस्तखत करने के लिए बैठे हैं?
क्या ACP ने इतना भी देखने की ज़हमत नहीं उठाई कि नागरिक पूछ क्या रहा है और जांच अधिकारी अमृता देशमुख जवाब क्या दे रही हैं?
जिस RTI पर जनता इतना भरोसा करती है, उस RTI में सवालों को पूरी तरह दरकिनार करके भ्रामक जवाब भेजना क्या जनता के विश्वास पर सीधा प्रहार नहीं है?
❓ DGP और पुलिस कमिश्नर से ‘संसद वाणी’ का सीधा सवाल
अब तत्कालीन सीनियर PI शैलेंद्र नागरकर और जांच अधिकारी अमृता देशमुख का तबादला (Transfer) हो चुका है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ट्रांसफर कोई ऐसी वाशिंग मशीन है जिसमें जाते ही अधिकारियों की घोर लापरवाही के पाप धुल जाते हैं?
‘संसद वाणी’ महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुंबई पुलिस कमिश्नर (CP) से सीधा सवाल करती है:
क्या अब सिर्फ कोर्ट ही आखिरी उम्मीद? जब पुलिस बीएमसी के सरकारी खत को रद्दी समझती है और RTI में गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लेती है, तो क्या अब जनता को 3 महीने की देरी का हिसाब मांगने और FIR दर्ज कराने के लिए भी कोर्ट का ही सहारा लेना पड़ेगा?
अधिकारियों पर कार्रवाई कब? कर्तव्य में घोर लापरवाही (Dereliction of Duty) के लिए क्या अमृता देशमुख और शैलेंद्र नागरकर पर विभागीय जांच (Departmental Enquiry) और BNS की धारा 198/199 के तहत कार्रवाई होगी?
संसद वाणी विचार: जब कानून के रखवाले ही जनता के भरोसे (RTI) की धज्जियाँ उड़ाने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था में सड़न बहुत गहरी हो चुकी है। अब देखना यह है कि पुलिस के आला अफसर अपनी साख बचाते हैं या मालवणी पुलिस की इस मनमानी पर पर्दा डालते हैं!