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मुंबई/संसद वाणी: मलाड वेस्ट, मालवणी गेट नंबर 8 से एक ऐसा मामला सामने आया है जो महाराष्ट्र के प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। सांसद वाणी (SANSAD VANI) के लीगल एडवाइजर ओम प्रकाश मिश्रा (अधिवक्ता) ने पुख्ता सबूतों और ब्लू प्रिंट के साथ यह खुलासा किया है कि कैसे सरकारी धन का उपयोग नियमों को कुचलने के लिए किया जा रहा है।
असलम शेख का ‘पावर गेम’ और जनता का पैसा
मालवणी की ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी में 15 साल पुराने वाटर टैंक पर सीमेंट की छत डालकर उसे अवैध रूप से ढंक दिया गया है। आरोप है कि इस अवैध निर्माण के पीछे विधायक असलम शेख का हाथ है और उन्हीं की ‘विधायक निधि’ से यह काम हुआ है।
कानूनी सवाल: क्या महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act) के तहत किसी भी ‘सर्विस यूनिट’ (Water Tank) के मूल स्वरूप को बदलना अपराध नहीं है? अगर ब्लू प्रिंट में वहां निर्माण की अनुमति नहीं है, तो असलम शेख ने किस आधार पर वहां सरकारी फंड जारी किया? क्या पद की गरिमा और पावर का घमंड इतना है कि नियमों की कोई कीमत नहीं रह गई?
अधिकारी की लाचारी या मिलीभगत?
म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं कि “विधायक का फंड लगा है, इसलिए कुछ नहीं कर सकता।” यह बयान सीधे तौर पर सरकारी कुर्सी का अपमान है। क्या म्हाडा अब असलम शेख के निजी निर्देशों पर चलेगी या कानून पर?
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस जी, जवाब दीजिए!
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के नाते, देवेन्द्र फडणवीस जी से जनता कुछ सीधे सवाल पूछ रही है:
- क्या विधायक असलम शेख इतने ताकतवर हैं कि वे सरकारी फंड का उपयोग अपनी मर्जी से कहीं भी ‘अवैध निर्माण’ के लिए कर सकते हैं?
- ब्लू प्रिंट और पुख्ता सबूत होने के बाद भी क्या प्रशासन असलम शेख के रसूख के आगे नतमस्तक रहेगा?
- क्या आप इन पुराने संबंधों और राजनीतिक प्रभाव को दरकिनार कर इस अवैध ढांचे पर ‘बुलडोजर’ चलाने और दोषी अधिकारी रोहित शिंदे पर कार्रवाई करने का आदेश देंगे?
निष्कर्ष
ओम प्रकाश मिश्रा (अधिवक्ता) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकारी फंड का दुरुपयोग है। अगर इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि मुंबई में रसूखदार नेताओं के लिए कोई कानून नहीं है।