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मुंबई (संसद वाणी): लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया द्वारा जब सबूतों के साथ किसी भ्रष्टाचार की पोल खोली जाती है, तो उम्मीद होती है कि शासन जागेगा। लेकिन मालवणी में तो गंगा ही उल्टी बह रही है। संसद वाणी द्वारा लगातार सनसनीखेज खुलासे और पुख्ता सबूत पेश किए जाने के बावजूद, यहाँ का प्रशासन और म्हाडा के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।
1. अमृता देशमुख: 3 महीने में NC, 1 साल बाद भी पद पर बरकरार!
मालवणी पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है जब एक अदद NC (Non-Cognizable) फाइल करने में अधिकारी अमृता देशमुख को 3 महीने लग जाते हैं। एक साल बीत जाने के बाद भी मैडम अपनी कुर्सी पर मजबूती से डटी हुई हैं। क्या पुलिस विभाग में लापरवाही अब इनाम का पैमाना बन गई है? जनता पूछ रही है—आखिर किसके आशीर्वाद से यह ढिलाई जारी है?
2. स्वप्नपूर्ति सोसाइटी: अवैध पार्किंग और ‘मौत’ का बोर्ड
स्वप्नपूर्ति सोसाइटी और फेडरेशन के अध्यक्ष ने म्हाडा की ‘आपातकालीन जगह’ (Emergency Space) को अपनी जागीर समझकर अवैध पार्किंग का अड्डा बना दिया है।
सबूत
नियमों की धज्जियां: म्हाडा गोरेगांव के अधिकारियों ने नोटिस दिया, बुलडोजर लाए, 1 लाख 8 हजार का जुर्माना भी ठोंका।
अहंकार की पराकाष्ठा: गेट पर लगा भारी लोहे का बोर्ड एक बार गिर चुका है, जिससे मासूम बच्चों की जान को खतरा है। फिर भी, अध्यक्ष का ‘पावर गेम’ जारी है और बोर्ड वहीं का वहीं है।
B.S. Katre का ‘जुगाड़’ प्रेम? म्हाडा अधिकारी बी.एस. कतरे ने जांच तो बैठाई, लेकिन जब दोषी सामने आए तो उन्हें ‘क्लीन चिट’ दे दी। चर्चा है कि यह सुनवाई न्याय के लिए नहीं, बल्कि दोषियों को ‘जुगाड़’ का समय देने के लिए की जाती है।
3. ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी: MLA फंड के नाम पर अवैध निर्माण का खेल?
यहाँ तो हद ही पार हो गई! 15 साल पुराने खंडहरनुमा वॉटर टैंक पर ओपन शेड बना दिया गया, जहाँ अब इवेंट और डांस चल रहे हैं।
सबूत
अधिकारी का अजीब तर्क: म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे का कहना है कि यह निर्माण MLA असलम शेख के फंड से हुआ है, इसलिए वे कुछ नहीं कर सकते।
सवाल: क्या विधायक का फंड अवैध निर्माण करने का लाइसेंस देता है? आपातकालीन रास्तों पर गेट लगाना और दीवार तोड़कर म्हाडा की जमीन कब्जाना क्या अब कानूनी हो गया है?
सबूत
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री जी, क्या आप सुन रहे हैं?
मालवणी की इन घटनाओं से साफ है कि महाराष्ट्र सरकार के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अधिकारी बेखौफ हैं क्योंकि उन्हें पता है कि ‘ऊपर’ बैठे आका उनकी ढाल बने हुए हैं। जनता जान की बाजी लगा रही है और अधिकारी भ्रष्टाचार की मलाई खा रहे हैं।
SANSAD VANI चुप नहीं बैठेगा। जब तक इन भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध कब्जाधारियों पर कानूनी चाबुक नहीं चलता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।