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MHADA का ‘मालवणी सरेंडर’: विधायक असलम शेख की निधि बनी अवैध निर्माण का सुरक्षा कवच, अधिकारी रोहित शिंदे ने टेके घुटने!

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मुंबई/संसद वाणी: क्या मुंबई में सरकारी जमीन पर कब्जा करने का नया तरीका ‘विधायक निधि’ बन गया है? मलाड वेस्ट के मालवणी से आई खबर प्रशासन और राजनीति के उस गठजोड़ को बेनकाब करती है, जहाँ कानून की किताब को किनारे रखकर ‘नेताओं की मर्जी’ को ही संविधान मान लिया गया है।

असलम शेख का फंड और नियमों की बलि

मालवणी की ओम सिद्धिविनायक सोसायटी में 15 साल पुराने वाटर टैंक के ऊपर सीमेंट की चदरें डालकर उसे एक गार्डन का रूप दे दिया गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह निर्माण पूरी तरह अवैध है। जब इस मामले में म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे को घेरा गया, तो उन्होंने सारा ठीकरा विधायक पर फोड़ दिया। शिंदे का स्पष्ट तर्क है: “चूँकि इसमें विधायक असलम शेख का फंड लगा है, इसलिए इस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।”


यहाँ उठते हैं गंभीर कानूनी सवाल:

  1. विधायक निधि का दुरुपयोग: सरकारी नियमों के अनुसार, विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MLALAD) का पैसा केवल उन्हीं कार्यों में खर्च हो सकता है जो कानूनी रूप से वैध हों। क्या असलम शेख ने बिना नक्शा पास कराए अवैध ढांचे के लिए फंड जारी कर नियमों का उल्लंघन किया है?
  2. नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act): महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 52 के तहत, स्वीकृत नक्शे (Blue Print) के बाहर किया गया कोई भी बदलाव दंडनीय अपराध है। वाटर टैंक के ऊपर निर्माण स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी के लिए खतरा है।

अधिकारी या राजनीतिक एजेंट?

रोहित शिंदे का यह बयान कि ‘विधायक का फंड है इसलिए हाथ नहीं डालूंगा’, उनकी प्रशासनिक निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान है। म्हाडा नियमावली के अनुसार, एक अधिकारी की पहली जिम्मेदारी सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा है, न कि राजनीतिक आकाओं के अवैध निर्माण को संरक्षण देना।

रोहित शिंदे का ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही विवादों में रहा है:

  • लापरवाही की आदत: वशिष्ठ वाणी की रिपोर्ट के मुताबिक, शिंदे शिकायतों पर कुंडली मारकर बैठने के लिए मशहूर हैं।
  • अवैध कब्जों को मौन सहमति: मालवणी में कई जगहों पर अवैध केबिन और फेडरेशन के अवैध बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई न करना उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाता है।

निष्कर्ष: जनता का पैसा, नेता का कब्जा!

यह मामला केवल एक गार्डन का नहीं है, बल्कि यह उस भ्रष्टाचार का है जहाँ जनता के टैक्स (Tax) के पैसे का इस्तेमाल अवैध निर्माण में किया जाता है और फिर उसी पैसे का वास्ता देकर अधिकारी कार्रवाई से बचते हैं। अगर विधायक असलम शेख का फंड कानून से ऊपर है, तो क्या म्हाडा को अपनी नियमावली जला देनी चाहिए?

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