Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान ने बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया है। इस हमले में कम से कम 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सैन्य ठिकाने पर खड़े कई अमेरिकी वायुसेना के रिफ्यूलिंग विमान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे राज्य‑स्तरीय सैन्य ऑपरेशन पर प्रभाव पड़ सकता है।
यह हमला ऐसे समय आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। हाल ही में इजरायल ने ईरान के परमाणु व राष्ट्रीय सुरक्षा ठिकानों पर सीमित, लेकिन निर्णायक तरीके से हमला किया, जिसके जवाब में ईरान सऊदी अरब, अमेरिका और इजरायल पर लक्षित कार्रवाई कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान का कम से कम दूसरा हमला है। इससे पहले भी वहां कई ईंधन विमानों को निशाना बनाया गया था। अब अमेरिका ने मध्य पूर्व में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की योजना बनाई है, ताकि आगे के हमलों से निपटा जा सके।
सऊदी सरकार ने भी अपने रक्षा मंत्रालय के माध्यम से स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान ने फिर से खाड़ी देशों के खिलाफ हमला किया तो वह अमेरिकी वायुसेना और अन्य मित्र देशों को आवश्यकता पड़ने पर खुली छूट देने पर विचार कर सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस हमले के बाद इजरायल–ईरान–अमेरिका त्रिकोण के बीच जवाबी कार्रवाई और बढ़ती रही तो पूरा क्षेत्र एक बड़े सैन्य टकराव की ओर जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप तेल बाजार, व्यापार मार्ग, और आम जनजीवन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।