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विशेष रिपोर्ट (मुंबई): बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के पी उत्तर (मालाड) वार्ड में नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर एक ही अधिकारी को सालों से एक ही पद पर बनाए रखने का मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) से मिले आधिकारिक दस्तावेजों ने बीएमसी प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट अभिमान बागुल द्वारा मांगी गई जानकारी पर बीएमसी की जन सूचना अधिकारी श्रीमती ज्योति तांबे ने लिखित रूप से कबूला है कि अधिकारी आनंद जाधव 04 अक्टूबर 2021 से पी उत्तर विभाग में तैनात हैं। यानी मई 2026 तक उनका कार्यकाल 4 वर्ष, 7 महीने और 21 दिन हो चुका है।
नियमों की सरेआम अनदेखी
‘महाराष्ट्र शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण का नियमन अधिनियम, 2005’ के तहत किसी भी अधिकारी का एक ही पद पर सामान्य कार्यकाल अधिकतम 3 वर्ष निर्धारित है। 3 साल पूरा होते ही तबादला होना अनिवार्य है, लेकिन आनंद जाधव के मामले में नियमों को दरकिनार कर दिया गया।
बीएमसी प्रशासन से तीखे सवाल
- किसके ‘आशीर्वाद’ से टिके हैं आनंद जाधव? जब कानून 3 साल में तबादले का आदेश देता है, तो पौने पांच साल से उन्हें हटाने की हिम्मत बीएमसी का कौन सा अधिकारी नहीं जुटा पा रहा है?
- क्या कमिश्नर की लिखित मंजूरी है? 3 साल से ज्यादा का कार्यकाल सिर्फ विशेष परिस्थितियों में बीएमसी कमिश्नर की लिखित मंजूरी से बढ़ सकता है। क्या आनंद जाधव के पास ऐसा कोई आदेश है, या यह सीधी प्रशासनिक मनमानी है?
- मालाड से ही इतना मोह क्यों? पूरे मुंबई में दर्जनों वार्ड हैं, लेकिन आनंद जाधव को पी उत्तर वार्ड में ही क्यों बनाए रखा गया है?
- सतर्कता विभाग (Vigilance) क्यों खामोश है? एक ही जगह पर इतने लंबे समय तक जमे रहने से साठगांठ की आशंकाएं बढ़ती हैं। क्या बीएमसी का विजिलेंस विभाग आंखें मूंदकर बैठा है?
अगली कानूनी कार्रवाई
RTI के इस सबूत के आधार पर आवेदक सम्राट बागुल अब प्रथम अपीलीय अधिकारी कुंदन वळवी (सहायक आयुक्त) के पास जवाबदेही तय करने की याचिका दायर कर रहे हैं। साथ ही इस मामले की शिकायत बीएमसी कमिश्नर, मुख्य सतर्कता अधिकारी और महाराष्ट्र लोकायुक्त से भी की जा रही है।