नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026:
भारत और अमेरिका के बीच आज एक महत्वपूर्ण और व्यापक व्यापार समझौता की घोषणा हुई है, जिसमें अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद बढ़ गयी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का संकेत बताया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में कहा कि इस फैसले के बाद “भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे” और इसे “दोनों देशों के लिए एक बड़ा व्यापारिक अवसर” कहा है।
टैरिफ में कटौती से क्या बदल सकता है
अब तक भारतीय सामानों पर अमेरिकी बाजार में लागू कुल शुल्क लगभग 50% तक था जिसमें दंडात्मक शुल्क भी शामिल था। अब रेसिप्रोकल टैरिफ सीधे 18% तक घट गया है, जिससे भारतीय निर्यातक क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा में ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खासकर विनिर्माण, कृषि-उत्पाद, कपड़ा, टेक्सटाइल, जेम्स-जेवेलरी और समान वस्तुओं के निर्यात को फायदा मिल सकता है, क्योंकि अब अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भारतीय उत्पादों की कीमत पहले से कम होगी।
भारत सरकार और मंत्रियों की प्रतिक्रिया
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “कूटनीतिक सफलता” बताया और कहा कि यह निर्णय लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) तथा एक्सपोर्टर्स को राहत देगा। उन्होंने टैरिफ कटौती को “भारत के व्यापार हितों की स्पष्ट जीत” कहा है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि यह डील किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों का समान रूप से सम्मान करती है और व्यापार बाधाओं को चरणबद्ध तरीके से कम करने का मार्ग तय करेगी।
व्यापारिक और बाजार असर
इस घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जहाँ निवेशकों ने इसे विस्तृत व्यापार अवसरों का संकेत माना है। एक्सपोर्ट सेक्टर विशेषकर समुद्री भोजन, कृषिजन्य उत्पादों और टेक्सटाइल उद्योग में उछाल की उम्मीद जताई जा रही है।
मुद्दे और चिंताएँ
बाहरी जानकारियों के अनुसार, कई विश्लेषक बताते हैं कि समझौते का पूरा विवरण और तकनीकी रूप से लागू होने वाले नियम अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं, जिससे प्रभाव की वास्तविकता भविष्य में स्पष्ट होगी। वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने डील की पारदर्शिता और कृषि से जुड़े समझौतों पर अधिक खुलासा की मांग की है।