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उत्तर प्रदेश

यूपी में सीएम योगी: “बाबरी मस्जिद अब कभी नहीं बनेगी”, अखिलेश यादव ने किया पलटवार

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 10 फरवरी 2026 – उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से बाबरी मस्जिद को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। मंगलवार को बाराबंकी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि विवादित बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण इतिहास में कभी नहीं होगा।

सीएम योगी ने सभा में कहा कि “कयामत तक बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण नहीं होगा” और जो लोग इसके बारे में सपना देखते हैं, उस दिन का आगमन कभी नहीं होगा। उन्होंने लोगों से कानून का पालन करने और शांति बनाए रखने की अपील भी की।

योगी का बयान — कड़ी प्रतिक्रिया का संदेश

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर के निर्माण को साकार कर दिखाया है, और अब बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कायदे से रहना ही फायदे में रहना है और कानून तोड़ने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उनका यह बयान राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे महामंत्रियों के बीच आगामी चुनावों और सामाजिक लड़खड़ाहट को लेकर बहस और तेज हो गई है।


अखिलेश यादव का पलटवार

मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीएम योगी के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को उर्दू शब्दों से समस्या है और उन्हें “कयामत” जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि यह बयान तब आया है जब सरकार कमजोर पड़ रही है, और ऐसे में वह सांप्रदायिक राजनीति का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी समाज में और अधिक दरारें पैदा कर सकती है।

सपा की टिप्पणी में यह भी जोड़ा गया कि योगी सरकार को मुस्लिम-हिंदू समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने की ज़रूरत है, बजाय इसके कि ऐसे भावनात्मक मुद्दों को राजनीतिक बहस का विषय बनाया जाए।


बाबरी मस्जिद विवाद — पृष्ठभूमि

बाबरी मस्जिद विवाद दशकों से भारतीय राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है। दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद इसे लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली, जिसका निपटारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को सुनाए आयोध्या फैसले में किया था। अदालत ने विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और मुस्लिम पक्ष को दूसरे स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था।

इस फैसले के बाद से राम मंदिर का निर्माण कार्य जारी है और वहीं विवाद का विषय बना बाबरी मस्जिद अब सार्वजनिक-राजनीतिक बहस में फिर से उभर आया है।


राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान बयानबाजी आगामी चुनावों की रणनीति, सामाजिक ध्रुवीकरण और धार्मिक भावनाओं को भुनाने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार विकास मुद्दों की तुलना में संवेदनशील धार्मिक मसलों को उभारकर वोट बैंक-राजनीति कर रही है।

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