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मुंबई/सांसद वाणी: मालवणी की स्वयंपूर्ति सोसायटी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम फेडरेशन में चल रहे “अवैध साम्राज्य” का पर्दाफाश होने के बावजूद प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। ‘सांसद वाणी’ के पास मौजूद पुख्ता सबूत यह चीख-चीख कर कह रहे हैं कि फेडरेशन अध्यक्ष बालासाहेब भगत ने नियमों को ताक पर रख दिया है, लेकिन म्हाडा के उपनिबंधक बी.एस. कटारे की रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
चार बड़े प्रमाण: जो भगत और प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं
1. आपातकालीन रास्तों पर कब्जा (Photo Evidence): ‘सांसद वाणी’ वह तस्वीरें जारी कर रहा है जिनमें स्पष्ट दिख रहा है कि आपातकालीन (Emergency) रास्तों पर अवैध रूप से पार्किंग की गई है। यदि परिसर में कोई दुर्घटना या आग लगती है, तो एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का अंदर आना नामुमकिन है। यह सीधे तौर पर निवासियों की जान से खिलवाड़ है।
2. म्हाडा का अवैध पार्किंग नोटिस: म्हाडा क्षेत्र निर्माण (गोरेगांव) ने फेडरेशन को पहले ही अवैध पार्किंग के खिलाफ नोटिस जारी किया है। यह साबित करता है कि सरकारी रिकॉर्ड में यह जगह पार्किंग के लिए नहीं है, फिर भी वहां गाड़ियां खड़ी करवाई जा रही हैं।
3. अवैध निर्माण और ₹1.08 लाख का जुर्माना: तीसरा और सबसे बड़ा प्रमाण है म्हाडा द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ जारी नोटिस। प्रशासन ने न केवल अवैध निर्माण को चिन्हित किया, बल्कि 1 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सवाल यह है कि जुर्माना लगने के बाद भी निर्माण क्यों नहीं हटाया गया और भगत को पद से क्यों नहीं बर्खास्त किया गया?
4. अवैध वसूली का ‘पर्ची’ खेल: वाहन मालिकों द्वारा साझा की गई रसीदें (Receipts) यह साबित करती हैं कि फेडरेशन के दबाव में सोसायटी द्वारा पार्किंग की राशि वसूली जा रही थी। यह सीधे तौर पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला है।
उपनिबंधक बी.एस. कटारे की भूमिका संदिग्ध?
इतने सारे दस्तावेजी सबूत और म्हाडा गोरेगांव विभाग की रिपोर्ट होने के बाद भी, उपनिबंधक बी.एस. कटारे ने अब तक बालासाहेब भगत के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की?
बड़ा सवाल: क्या म्हाडा के अधिकारी किसी बड़े राजनीतिक दबाव में हैं, या फिर रक्षक ही भक्षकों के साथ मिल गए हैं?
जनता की मांग
सोसायटी के निवासी अब डरे हुए हैं। उनका कहना है कि यदि कल को कोई जनहानि होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
‘सांसद वाणी’ इस मामले में म्हाडा के वरिष्ठ अधिकारियों और सहकारिता मंत्रालय से जवाब मांगेगा।