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मुंबई/संसद वाणी: देश के कद्दावर नेताओं में शुमार और उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले मालाड (वॉर्ड 35) से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में ‘कर्सन’ नामक एक कथित भू-माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि पूरा सरकारी तंत्र उसके आगे नतमस्तक नजर आ रहा है।
मुंबई के मलाड (पश्चिम) क्षेत्र में प्रशासन और भू-माफियाओं के बीच कथित मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। भदरण नगर, रोड नंबर 1 (रेलवे ट्रैक के पास), कोयला वाला गली में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण ने बीएमसी (BMC) के दावों की पोल खोल दी है।
सत्ता का समीकरण, फिर भी जनता बेबस
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है क्योंकि यहाँ राजनीतिक समीकरण पूरी तरह सत्ता पक्ष के अनुकूल हैं:
नगरसेवक: वॉर्ड 35 में भाजपा का प्रतिनिधित्व है।
सांसद: केंद्र के दिग्गज मंत्री पीयूष गोयल खुद यहाँ के सांसद हैं।
प्रशासन: बीएमसी (BMC) की कमान भी लंबे समय से वर्तमान सरकार समर्थित रही है।
इसके बावजूद, अवैध कब्जों और भू-माफियाओं की गतिविधियों पर लगाम नहीं लग पा रही है। स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है— “क्या इतने बड़े नेताओं के होने के बावजूद मालाड की जनता माफियाओं के भरोसे रहेगी?”
मौन साधे बैठा प्रशासन और जनप्रतिनिधि
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर न ही मुंबई की मेयर की ओर से कोई कड़ा रुख दिखा है और न ही सांसद कार्यालय की तरफ से प्रभावी हस्तक्षेप। वॉर्ड 35 के नगरसेवक, जिन्हें जमीन की हर गतिविधि की जानकारी होती है, उनकी चुप्पी ने भी कई संदेहों को जन्म दिया है।
अवैध निर्माण: सरकारी और निजी जमीनों पर माफियाओं का बढ़ता हस्तक्षेप।
प्रशासनिक मिलीभगत: क्या बीएमसी अधिकारी जानबूझकर इन शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं?
जनता का डर: स्थानीय निवासी डरे हुए हैं कि अगर वे खुलकर सामने आते हैं, तो उन पर हमला हो सकता है।
निष्कर्ष:
मालाड की जनता अब सीधे मुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग कर रही है। यदि जल्द ही इस ‘कथित माफिया’ के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई या कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया, तो यह आगामी चुनावों में स्थानीय नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।