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मुम्बई

संसद वाणी विशेष: क्या मालाड में संविधान नहीं, भू-माफिया ‘कर्सन’ का कानून चलता है?

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मुंबई (संसद वाणी): देश की आर्थिक राजधानी और महाराष्ट्र के हाई-प्रोफाइल प्रशासन पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। मालाड (पश्चिम) के वार्ड 35 से एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ सत्ता, प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे एक भू-माफिया न केवल सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है, बल्कि आवाज उठाने वालों का खून बहाने से भी नहीं कतरा रहा।


📍 घटनास्थल: भदरण नगर, रोड नंबर 1 (रेलवे ट्रैक के पास), कोयला वाला गली

  • यहाँ भू-माफिया कर्सन द्वारा अवैध निर्माण का काला खेल धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बीएमसी (BMC) अधिकारी कुंदन वाल्वी की संदिग्ध चुप्पी ने इस अवैध साम्राज्य को फलने-फूलने की पूरी आजादी दे रखी है।

⚠️ एक साल से नोटिस सिर्फ कागजों पर!

  • हैरानी की बात यह है कि 21 मई 2025 को बीजेपी के पूर्व वार्ड अध्यक्ष जिग्नेश परमार ने इस अवैध निर्माण के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ लिखित शिकायत की थी। शिकायत के दबाव में बीएमसी ने माफिया कर्सन को नोटिस तो जारी किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन ‘कुंभकरणी नींद’ सो गया। एक साल बीत जाने के बाद भी न तो निर्माण रुका और न ही बीएमसी का हथौड़ा चला।

🩸 न्याय मांगने पर मिला ‘जानलेवा हमला’

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा जिग्नेश परमार को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ी। आरोप है कि माफिया कर्सन ने उन पर इस कदर हमला किया कि उनका चेहरा और पीठ बुरी तरह सूज गई।

पुलिस की सुस्ती पर सवाल:

घायल अवस्था में जब जिग्नेश मालाड पुलिस स्टेशन पहुँचे, तो वहां के वरिष्ठ अधिकारियों ने एफआईआर (FIR) दर्ज करने में कथित तौर पर एक पूरा दिन लगा दिया। यह देरी अपराधियों के प्रति पुलिस के ‘नरम रुख’ या ‘बाहरी दबाव’ की ओर इशारा करती है।

संसद वाणी के तीखे सवाल:

  • नगरसेवक योगेश वर्मा: आपके वार्ड में आपके ही कार्यकर्ता को लहूलुहान किया गया, आप चुप क्यों हैं?
  • सांसद पीयूष गोयल: क्या आपके क्षेत्र में माफिया का डर कानून से बड़ा हो गया है?
  • मुंबई मेयर: नोटिस जारी होने के बाद भी एक साल तक कार्रवाई क्यों रुकी रही?
  • देवेंद्र फडणवीस जी: क्या यही आपका ‘सुशासन’ है जहाँ माफिया सरेआम लोगों को मार रहे हैं?

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वार्ड 35 में बीजेपी का नगरसेवक, बीजेपी का सांसद और मेयर भी बीजेपी समर्थित, इसके बावजूद एक कार्यकर्ता को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अगर समय रहते माफिया कर्सन और उसका साथ देने वाले अधिकारी कुंदन वाल्वी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का प्रशासन से भरोसा उठना तय है।

संसद वाणी इस मामले की गहराई से जांच और दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करती है।

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