Connect with us

धर्म

OBC 27% कोटा: अनुच्छेद 15(5) के लागू फायदे में देरी पर बढ़ रहा विवाद

Published

on

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

22 जनवरी 2026

नई दिल्ली — भारत में अनुच्छेद 15(5) के तहत OBC (अन्य पिछड़े वर्ग) के लिए 27% आरक्षण के लाभ को लेकर लंबे समय से विवाद और देरी बनी हुई है। यह संवैधानिक प्रावधान संविधान के 93वें संशोधन के तहत 2006 में लागू हुआ था, ताकि उच्च शिक्षा में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को विशेष अवसर दिए जा सकें — जिसमें सरकार संचालन वाले तथा निजी शैक्षणिक संस्थान दोनों शामिल हों।

क्या है अनुच्छेद 15(5)?

अनुच्छेद 15 में जोड़ा गया खंड (5) राज्य को अधिकार देता है कि वह अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पर विशेष प्रावधान / आरक्षण लागू कर सके — यह प्रावधान निजी संस्थानों सहित सभी संस्थानों पर लागू होना चाहिए, सिवाय अल्पसंख्यक संस्थानों के।

लागू होने के बावजूद देरी क्यों?

हाल के मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 20 साल बाद भी अनुच्छेद 15(5) के पूरे लाभ को प्राइवेट कॉलेजों और यूनिवर्सिटी तक प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है। केन्द्र और राज्य स्तर पर केवल सरकारी और केंद्रीय संस्थाओं जैसे IIT, IIM, NIT आदि में 27% आरक्षण लागू है, लेकिन निजी संस्थानों में इस प्रावधान का कानूनी ढाँचा अभी तक तैयार नहीं हो सका है, जिससे बड़े पैमाने पर OBC छात्रों तक इसका लाभ नहीं पहुँच पा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अनुच्छेद 15(5) भारत के रिज़र्वेशन नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव था, क्योंकि यह निजी शिक्षा क्षेत्‍र तक आरक्षण को विस्तारित करता है — जहाँ आज अधिकतर विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसके बिना, यह केवल सैद्धांतिक प्रावधान बनकर रह गया है।

राजनीतिक और कानूनी मांगें तेज

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बनाया है कि संसद में एक कानून लाना चाहिए जिससे अनुच्छेद 15(5) को निजी संस्थानों में लागू करना अनिवार्य हो जाए। पार्टी का कहना है कि प्राइवेट कॉलेजों में आरक्षण के बिना पिछड़े वर्ग के छात्रों का प्रतिनिधित्व काफी कम है और सामाजिक समानता का लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा।

इसी बीच कुछ राज्यों में उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने भी OBC आरक्षण लागू करने या उसे प्रभावी करने संबंधी मामलों में नोटिस और उत्तर की मांग की है, जिससे यह मुद्दा न्यायिक रूप से भी गरमाया हुआ है।

छात्र और समाज पर प्रभाव

आरक्षण के पूरा लाभ नहीं मिलने के कारण OBC समुदाय के विद्यार्थियों को श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश के समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। इससे प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ता है और पिछड़े वर्ग के छात्रों का प्रतिनिधित्व कम होता है — जो आरक्षण नीति का मूल उद्देश्य था।

आगे क्या होगा?

विश्लेषकों के अनुसार, यदि संसद में इस प्रावधान के व्यवहार्य और मजबूत कानूनी ढांचे को पारित कर कार्यान्वित किया जाता है, तो यह OBC वर्ग के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच और रोजगार के अवसरों में सुधार ला सकता है। इसके साथ ही, यह भारत की सामाजिक न्याय नीति को और अधिक समावेशी बना सकता है।

Copyright © 2026 Vashishtha Media House Pvt. Ltd.