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मुंबई (संसद वाणी): मुंबई पुलिस कमिश्नर के ‘जीरो टॉलरेंस’ दावों को कांदिवली ट्रैफिक विभाग के अधिकारी सतीश राउत ठेंगा दिखा रहे हैं। कांदिवली वेस्ट की मुख्य सड़कें अब राहगीरों के लिए नहीं, बल्कि अवैध पार्किंग माफिया और अवैध गैराज संचालकों के लिए ‘स्वर्ग’ बन गई हैं। संसद वाणी की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
📍 तीन पॉइंट, तीन सबूत: पुलिस की नाकामी या मिलीभगत?
- चारकोप सिग्नल (Charkop Signal): सिग्नल के मुहाने पर ही वाहनों की लंबी कतारें अवैध रूप से खड़ी रहती हैं। ट्रैफिक नियमों के अनुसार सिग्नल के पास पार्किंग वर्जित है, लेकिन यहाँ पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियम तार-तार हो रहे हैं।
- चारकोप पेट्रोल पंप (Charkop Petrol Pump): पेट्रोल पंप जैसी संवेदनशील जगह के पास भी भारी वाहनों का जमावड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। क्या विभाग किसी बड़े अग्निकांड का इंतजार कर रहा है?
- एकता नगर सिग्नल (Ekta Nagar): यहाँ की स्थिति सबसे भयावह है। सिग्नल ही अब गैराज बन चुका है। सरेआम सड़क पर ऑटो मैकेनिक गाड़ियां खोलकर काम करते हैं। सिग्नल पर होने वाला यह अतिक्रमण बिना स्थानीय ट्रैफिक विभाग की ‘कृपा’ के संभव नहीं है।
❓ सवाल सतीश राउत की कार्यशैली पर:
जब से सतीश राउत ने कार्यभार संभाला है, तब से इन इलाकों में अवैध पार्किंग का जाल तेजी से फैला है।
- क्या सतीश राउत को ये अवैध गैराज और लाइन से खड़े वाहन दिखाई नहीं देते?
- क्या वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है?
- क्या यह केवल लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा ‘आर्थिक सांठगांठ’ है?
⚠️ विभाग की छवि पर दाग
कांदिवली की जनता अब यह पूछ रही है कि जब आम आदमी की गाड़ी 2 मिनट रुकने पर टो (Tow) कर ली जाती है, तो इन अवैध गैराजों और माफियाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेते हुए सतीश राउत की भूमिका की जांच करनी चाहिए और उन्हें इस पद से हटाकर किसी कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।
“अगर अगले 48 घंटों में इन सड़कों को खाली नहीं कराया गया, तो स्थानीय निवासी और संसद वाणी इस मामले को सीधे गृह मंत्रालय और ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे।”
ब्यूरो रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी