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मुम्बई

खबर छपी, सवाल उठा… फिर भी कार्रवाई नहीं — मलाड वेस्ट में नियम बेअसर?

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मुंबई । संसद वाणीविशेष रिपोर्ट

मलाड वेस्ट में फुटपाथ और सड़क पर हो रही कथित अव्यवस्थित पार्किंग का मामला अब एक महीने बाद भी जस का तस बना हुआ है। इस मुद्दे को लेकर संसद वाणी न्यूज़ ने 8 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से संबंधित विभागों से सवाल किया था कि क्या मलाड वेस्ट स्थित जैन सबकुछ फूड प्लाजा, मोदी हुंडई मलाड शोरूम और पास के टाटा मोटर्स कार शोरूम के बाहर फुटपाथ पर खड़े वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि 8 और 9 फरवरी को इस सवाल पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इसके बाद 9 फरवरी को जब इस विषय को समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, तब मुंबई RTO की ओर से जवाब दिया गया कि मामले की जानकारी गोरेगांव ट्रैफिक विभाग को दे दी गई है और जल्द कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन आज 7 मार्च 2026 तक भी स्थिति में कोई खास बदलाव दिखाई नहीं देता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फुटपाथ और सड़क पर खड़े वाहन पहले की तरह ही मौजूद हैं और पैदल चलने वालों को कई जगह सड़क के बीच से गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

फुटपाथ पर गाड़ियाँ, सड़क पर पैदल लोग

इलाके के लोगों का कहना है कि फुटपाथ पर पार्किंग और आसपास की दुकानों के कारण पैदल यात्रियों के लिए रास्ता लगभग बंद हो जाता है। ऐसे में उन्हें सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

BMC से भी पूछा गया सवाल

इस मामले में संसद वाणी न्यूज़ ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) से भी सवाल किया था। संबंधित स्थान पर “नो पार्किंग” के दो बोर्ड लगे होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठाया गया कि क्या यह नियम सभी वाहनों के लिए समान रूप से लागू है या फिर इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि अन्य वाहन वहां पार्क न कर सकें।
हालांकि इस प्रश्न पर भी BMC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्रोतों के हवाले से उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कथित तौर पर “मासिक लेन-देन” जैसी चर्चाएं भी सुनने में आती हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन चर्चाओं ने प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर लोगों के बीच सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई कब?

नागरिकों का कहना है कि आम तौर पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर तुरंत चालान या टोइंग की कार्रवाई होती है, लेकिन जब मामला बड़े प्रतिष्ठानों के आसपास की पार्किंग व्यवस्था से जुड़ता है तो कार्रवाई में देरी क्यों दिखाई देती है।

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और क्या मलाड वेस्ट में फुटपाथ और सड़क पर हो रही अव्यवस्थित पार्किंग को रोका जा सकेगा।

फिलहाल, यह मामला केवल एक इलाके का नहीं बल्कि ट्रैफिक नियमों के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न बन चुका है।

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