नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही, समावेशिता और जन-केंद्रित कार्यप्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएँ इन मूल्यों के साथ काम करती हैं, तभी वे जनता के विश्वास और अपेक्षाओं के अनुरूप रूप से प्रासंगिक और मजबूत बनी रह सकती हैं।
यह बयान उन्होंने 28वें राष्ट्रमंडल अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) के समापन सत्र में दिया, जिसका आयोजन नई दिल्ली में तीन दिवसीय कार्यक्रम के रूप में किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसमें राष्ट्रमंडल के अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि पारदर्शिता सार्वजनिक निर्णय-प्रक्रिया में खुलापन लाकर जनमत पर भरोसा बढ़ाती है, जबकि जवाबदेही लोकतंत्र की स्थायित्व और प्रभावशीलता सुनिश्चित करती है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को केवल कानून बनाने वाली संस्था के रूप में न देखकर, जनता की आकांक्षाओं और चिंताओं को गंभीरता से सुनने और उनका समाधान करने वाला मंच बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक बहसें रचनात्मक और तथ्य-आधारित होनी चाहिए, न कि आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहनी चाहिए। साथ ही विधायी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने हेतु डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी नवाचारों के समुचित उपयोग पर बल दिया।
अक्टूबर और दिसंबर 2025 के दौरान भी बिरला ने पारदर्शिता, जवाबदेही और orderly legislative conduct को लेकर अपनी विचारधारा को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यवाही में disruptions कम होने चाहिए ताकि निष्कर्ष-उन्मुख बहसें और बेहतर सार्वजनिक नीति पर चर्चा हो सके।
विशेष रूप से संसद में सदस्यों की उपस्थिति को अब केवल सदन में अपनी सीट पर उपस्थित रहते ही दर्ज करने का निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य कार्यवाही में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
बिरला के नेतृत्व में यह रुख यह संकेत देता है कि भारतीय लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक के माध्यम से प्रभावी शासन को नई गति देने पर जोर बढ़ रहा है।