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विशेष जांच ब्यूरो, मुंबई (वशिष्ठ वाणी) — मुंबई के मालवणी गेट नंबर 8 स्थित सामना नगर (मालाड पश्चिम) की मालवणी स्वप्नपूर्ति सीएचएस और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम संस्था के अध्यक्ष बालासाहेब भगत के काले कारनामों और म्हाडा (MHADA) सहकारिता विभाग के उप-निबंधक (Deputy Registrar) बी.एस. कटरे की संदिग्ध भूमिका का बड़ा पर्दाफाश हुआ है।
वशिष्ठ मीडिया हाउस (Vashishth Media House) के निदेशक एवं समुह समाचार पर के स्वामी व प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ द्वारा इस पूरे भ्रष्टाचार का खुलासा किए जाने के बाद अब म्हाडा के उपाध्यक्ष (Vice President) से लेकर उप-निबंधक अधिकारी बी.एस. कटरे तक को अदालत (Court) का समन (Summon) जारी किया जा चुका है।
कार्रवाई के पुख्ता सबूत: जब म्हाडा गोरेगांव विभाग ने चलाया था बुलडोजर!
सामना नगर की जनता और सोसाइटी निवासियों को धोखे में रखकर चलाए जा रहे इस नेटवर्क के खिलाफ म्हाडा के अन्य विभागों ने पहले ही सख्त कदम उठाए थे:
- अवैध निर्माण पर बुलडोजर और जुर्माना: मुंबई क्षेत्र निर्माण मंडल (गोरेगांव) के अधिकारियों ने बालासाहेब भगत द्वारा किए गए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया था और ₹1,08,000 (एक लाख आठ हजार रुपये) का भारी जुर्माना ठोका था।
- आपातकालीन रास्ता कराया था बंद: आपातकालीन रास्ते (Emergency Exit) पर किए गए अवैध कब्जों को देखते हुए म्हाडा प्रशासन ने फेडरेशन को बाकायदा नोटिस जारी कर सभी अवैध गतिविधियाँ बंद करवाई थीं।
- जांच में अधिकारी महाजन ने पाया था दोषी: इससे पूर्व हुई म्हाडा की जांच में जांच अधिकारी महाजन ने बालासाहेब भगत को वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों का दोषी ठहराया था।
सबूतों के ढेर के बावजूद बी.एस. कटरे ने दी ‘क्लीन चिट’!
हैरानी और गंभीर चिंता की बात यह है कि म्हाडा गोरेगांव विभाग की कार्रवाई, जुर्माना, नोटिस और जांच अधिकारी महाजन की रिपोर्ट जैसे ठोस सबूतों के बावजूद उप-निबंधक बी.एस. कटरे ने महीनों चली सुनवाई के बाद मुख्य विषयों को दरकिनार करते हुए बालासाहेब भगत को निर्दोष (Clean Chit) करार दे दिया!
संसद वाणी की जांच में सामने आए गंभीर सवाल:
- अवैध पार्किंग से अवैध वसूली: आपातकालीन रास्तों को ब्लॉक करके वाहन मालिकों को धोखे में रखा गया और सोसाइटियों को निर्देश देकर अवैध पार्किंग शुल्क (Parking Charges) की वसूली कराई गई।
- दागी रिकॉर्ड के बावजूद न्याय की कुर्सी: आरोप है कि उप-निबंधक बी.एस. कटरे पर पहले से ही कुछ मुकदमे और विभागीय मामले विचाराधीन हैं, इसके बावजूद उन्हें पद से हटाने के बजाय सोसाइटियों के विवादों पर न्याय करने की कुर्सी सौंप दी गई!
अब अदालत (Court) में होगा पाई-पाई का हिसाब!
रूम मालिकों और सोसाइटियों द्वारा लगातार शिकायतों के बावजूद जब उप-निबंधक बी.एस. कटरे टस से मस नहीं हुए, तो वशिष्ठ मीडिया हाउस की लीगल टीम के हस्तक्षेप और अदालती प्रक्रिया के बाद अब बी.एस. कटरे और संबंधित म्हाडा अधिकारियों को कोर्ट का समन थमाया गया है।
अब माननीय अदालत के समक्ष जिम्मेदार अधिकारियों को निम्नलिखित सवालों के तीखे जवाब देने होंगे:
- जब म्हाडा गोरेगांव ने बुलडोजर चलाकर ₹1.08 लाख का जुर्माना लगाया, तो उप-निबंधक ने उस कार्रवाई को क्यों नजरअंदाज किया?
- जांच अधिकारी महाजन की रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद किस दबाव या साठगांठ के तहत क्लीन चिट दी गई?
- आपातकालीन रास्तों को बंद करके निवासियों की जान जोखिम में डालने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें शह क्यों दी गई?
[संसद वाणी की इस विशेष रिपोर्ट और अदालती सुनवाई पर नजर बनी रहेगी…]