Connect with us

बड़ी खबर

संसद वाणी’ का बड़ा खुलासा: 35 लाख का टैंकर घोटाला और 30 घोटालों की खुली पोल!

Published

on

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

मुंबई: ‘संसद वाणी’ के हाथ एक ऐसा सनसनीखेज और आधिकारिक दस्तावेज लगा है, जिसने सहकारिता जगत और म्हाडा (MHADA) के गलियारों में भूचाल ला दिया है। यह मामला वर्ष 2024 का है, लेकिन यह नया दस्तावेज प्रशासनिक तंत्र, म्हाडा के उपनिबंधक कार्यालय और मालवणी स्वप्नपूर्ति को-ऑप. हाउसिंग सोसायटी के पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।

आखिरकार किस आधार पर, किन ताकतों के इशारे पर और किसके संरक्षण में इतने बड़े घोटालों पर पर्दा डाला गया—यह अब एक बहुत बड़ा सवाल बन चुका है!

📄
संबंधित दस्तावेज़
उपलब्ध सरकारी दस्तावेज़ की प्रतियां — सभी पेज देखने के लिए नीचे क्लिक करें
संबंधित दस्तावेज़ पेज 1 / 5
दस्तावेज़ पेज

जांच अधिकारी ‘व्ही. पी. महाजन’ की रिपोर्ट: 30 गंभीर घोटालों का काला चिट्ठा

मामला मालाड पश्चिम के सामना नगर (गेट नंबर 8, मालवणी) स्थित मालवणी स्वप्नपूर्ति को-ऑप. हाउसिंग सोसायटी का है। सोसायटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत और उनकी टीम की मनमानी व तानाशाही के खिलाफ, ‘वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड’ के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के मालिक अभिषेक वशिष्ठ ने दिनांक 01 मार्च 2024 को म्हाडा उपनिबंधक कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए म्हाडा के अधिकृत जांच अधिकारी एवं प्रमाणित लेखापरीक्षक व्ही. पी. महाजन ने जब गहराई से छानबीन की, तो सोसायटी के भीतर एक-दो नहीं बल्कि पूरे 30 गंभीर कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक उल्लंघन (घोटाले) उजागर हुए। महाजन जी ने अपनी रिपोर्ट में एक-एक अनियमितता को बेबाकी से दर्ज किया, जिसमें सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मुद्दा ₹35,64,782/- (पैंतीस लाख चौसठ हजार सात सौ बयासी रुपये) का भारी-भरकम टैंकर खर्च था!

35 लाख का फर्जी टैंकर खर्च और जवाब देने में नाकामी

सोसायटी में रहने वाले आम रूम और फ्लैट मालिकों ने अपनी गाढ़ी कमाई और खून-पसीने के पैसों से मेंटेनेंस भरा है। लेकिन सवाल यह है कि पानी के टैंकर पर दिखाए गए इस 35 लाख रुपये से अधिक के भारी-भरकम खर्च का हिसाब कहाँ है?

जब जांच अधिकारी व्ही. पी. महाजन ने इस खर्च का रिकॉर्ड और प्रमाण मांगा, तो प्रबंध समिति और सचिव इसके समर्थन में महानगरपालिका (BMC) का कोई भी आधिकारिक पत्र-व्यवहार या वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। जनता की मेहनत की कमाई का यह पैसा आखिर कहाँ गया और किस पर खर्च हुआ—इसका कोई पुख्ता जवाब किसी के पास नहीं है।

ऑडिट और चुनाव का अवैध गठजोड़

जांच रिपोर्ट में महाजन ने एक और सबसे गंभीर खुलासा यह किया कि मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी का वैधानिक लेखापरीक्षण (ऑडिट) करने वाले श्री विष्णु कुंडलिक जाधव से ही, नियमों को ताक पर रखकर, सोसायटी का चुनाव भी संपन्न कराया गया। एक ही व्यक्ति द्वारा ऑडिट और चुनाव दोनों कराना सहकारिता नियमों और चुनाव प्राधिकरण के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। महाजन जी ने इसे अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता से दर्ज किया।

सबसे बड़ा सवाल: 30 घोटालों के बावजूद म्हाडा उपनिबंधक ‘बी. एस. कटरे’ ने कैसे दे दी क्लीन चिट?

यहीं से इस पूरे खेल में प्रशासनिक मिलीभगत का काला सच सामने आता है!

जब म्हाडा के अधिकृत जांच अधिकारी व्ही. पी. महाजन ने 30 बड़े घोटालों, 35 लाख के टैंकर फर्जीवाड़े और दोहरी भूमिका वाले ऑडिट-चुनाव का पर्दाफाश कर दिया, तो म्हाडा के उपनिबंधक बी. एस. कटरे ने क्या किया?

महीनों तक चली सुनवाई और पूरी रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद, उपनिबंधक बी. एस. कटरे ने अजीबोगरीब तरीके से मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत को निर्दोष साबित कर दिया!

‘संसद वाणी’ और आम जनता के सामने अब यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—

  • क्या 3-4 महीने तक चली सुनवाई के दौरान उपनिबंधक बी. एस. कटरे को रिपोर्ट में दर्ज वे 30 गंभीर बिंदु नहीं दिखाई दिए?
  • जिस अधिकारी (महाजन) ने अपनी रिपोर्ट में 30 घोटालों की पोल खोली और चुनाव अधिकारी की दोहरी भूमिका पर सवाल उठाए, क्या बी. एस. कटरे को वह सब नजरअंदाज करना सही लगा?
  • आखिर किसके दबाव या मेहरबानी के कारण 35 लाख के फर्जीवाड़े और 30 घोटालों पर पर्दा डालकर क्लीन चिट दे दी गई? इसका जवाब अब बी. एस. कटरे को देना ही होगा!

अब अदालती शिकंजा: सबको देना होगा जवाब

चूंकि प्रशासनिक स्तर पर मामले को दबाने की पूरी कोशिश की गई, इसलिए शिकायतकर्ता अभिषेक वशिष्ठ ने न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट (दिंडोशी) का दरवाजा खटखटाया, जहाँ Civil Suit No. 522 of 2026 दायर किया गया।

अदालत ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए म्हाडा के अधिकारियों, उपनिबंधक बी. एस. कटरे, तथा सोसायटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत, सचिव और खजान्ची सहित सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को समन जारी कर दिया है। इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी 29 अगस्त को तय की गई है।

अब न तो 35 लाख के टैंकर खर्च का हिसाब छुपाया जा सकता है, और न ही बी. एस. कटरे यह बता पाएंगे कि 30 घोटालों के सबूत होने के बावजूद क्लीन चिट क्यों दी गई। सहकारिता के नाम पर चल रहे इस अवैध खेल में अब सभी को अदालत के कटघरे में खड़े होकर जवाब देना होगा!

Continue Reading

Copyright © 2026 Vashishtha Media House Pvt. Ltd.