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बाराबंकी

बसौली गांव में भक्ति और साहित्य का संगम: प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में भव्य कवि सम्मेलन संपन्न

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बाराबंकी/संस दवाणी। बाराबंकी तहसील फतेहपुर क्षेत्र के ग्राम बसौली में उस समय भक्ति और साहित्य की अविरल धारा बह निकली, जब नर्मदेश्वर महादेव एवं श्री हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर एक विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, साहित्य प्रेमियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की।

विद्वानों के सानिध्य में शुभारंभ

​कार्यक्रम का संचालन और देखरेख प्रख्यात पंडित राजेश मिश्रा शास्त्री जी के कुशल सानिध्य में संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद शुरू हुए इस कवि सम्मेलन ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना को भी जागृत करते हैं।

कवियों ने बांधा समां

सम्मेलन के दौरान मंच पर जुटे नामचीन कवियों ने अपनी लेखनी और वाणी से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। प्रमुख रूप से:कवि ओम शर्मा ‘ओम’: अपनी ओजस्वी शैली में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए श्रोताओं में जोश भर दिया।शेखर त्रिपाठी: उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से संस्कृति और परंपराओं का सुंदर चित्रण किया।विजय मिश्रा: अपनी भावुक और मर्मस्पर्शी कविताओं से श्रोताओं को गहराई तक प्रभावित किया।कवियों ने राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। देर रात तक चले इस सम्मेलन में तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंजता रहा।

सफल आयोजन और प्रमुख उपस्थिति

इस पूरे भव्य आयोजन के मुख्य आयोजक अधिकराम मिश्रा रहे। उनके अथक प्रयासों और बेहतर प्रबंधन के कारण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में लवकुश मिश्रा और जगमोहन विश्वकर्मा उपस्थित रहे। उपस्थित गणमान्य लोगों ने कवियों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की और आयोजकों को बधाई दी।

भविष्य के लिए संकल्प

कवि सम्मेलन के समापन पर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। आयोजकों ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। अंत में यह संकल्प लिया गया कि सामाजिक और धार्मिक एकता को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के बौद्धिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

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